चीन की थाओलाई नदी सिंचाई प्रणाली विश्व विरासत सूची में शामिल

चित्र कानसू प्रांत जल संसाधन विभाग से है।
14 अक्टूबर की शाम, फ्रांस के मार्से में अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग की 77वीं अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान 2026 की विश्व सिंचाई इंजीनियरिंग विरासत सूची के 13वें संस्करण की घोषणा की गई। इसमें चीन की चार परियोजनाओं को शामिल किया गया। इनमें कानसू प्रांत की थाओलाई नदी मरूद्यान सिंचाई प्रणाली भी शामिल है, जो इस प्रांत की पहली विश्व सिंचाई इंजीनियरिंग विरासत बनी है।
थाओलाई नदी मरूद्यान सिंचाई प्रणाली कानसू प्रांत के चोंगश्युन और च्यायुक्वान शहरों के इलाकों में स्थित है। यह शुष्क क्षेत्र में नदी के पानी से मरूद्यानों की सिंचाई करने वाली एक विशिष्ट परियोजना है। इसका मुख्य जल स्रोत थाओलाई नदी है, जिसे छील्येन पर्वत की बर्फ और हिमनदों के पिघलने से पानी मिलता है। जल संरक्षण से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस सिंचाई प्रणाली का इतिहास दो हजार साल से भी ज्यादा पुराना है।
इस विरासत की सबसे खास बात इसकी पारंपरिक जल वितरण व्यवस्था है, जो आज भी जारी है। इसके तहत सिंचाई के लिए पानी देने का समय तय होता है, लेकिन पानी की मात्रा निश्चित नहीं होती। इस व्यवस्था को 'निर्धारित समय, अनिर्धारित मात्रा' कहा जाता है। यह चीन में आज भी प्रचलित ऐसी अनूठी जल आवंटन प्रणाली है, जिसमें समय के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के जल अधिकार तय किए जाते हैं। फिलहाल, इस प्रणाली के तहत करीब 63,187 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है।
इस सूची में शामिल होने से कानसू प्रांत में विश्व सिंचाई इंजीनियरिंग विरासत की अब तक की कमी पूरी हो गई है। साथ ही, यह परियोजना दुनिया के सामने चीन के उत्तर-पश्चिमी शुष्क क्षेत्र में हजारों वर्षों से चले आ रहे जल प्रबंधन और इंसान तथा प्रकृति के बीच तालमेल की परंपरा को भी सामने लाती है। इस बार सूची में चीन की तीन अन्य परियोजनाओं को भी जगह मिली है। इनमें हनान प्रांत की छिन नदी क्वांगली नहर, च्यांगशी प्रांत की क्वांगशिन ह्वांगशा नहर और फूच्येन प्रांत की छांगथाई लूंगचिन सिंचाई परियोजना शामिल हैं।