मांगखांग के नमक खेत: 1300 वर्षों से जारी नमक बनाने की अटूट परंपरा

मांगखांग के नमक कुआँ, जिसे तिब्बती भाषा में त्साकालो कहा जाता है, का अर्थ है “नमक का स्थान”। यहाँ धूप में सुखाकर नमक बनाने का इतिहास थांग राजवंश के समय से चला आ रहा है, जो 1300 वर्षों से भी अधिक पुराना है। चियाता गाँव मांगखांग काउंटी का सबसे पहला नमक उत्पादन स्थल है।

वर्ष 2008 में, “कुएँ के पानी से प्राकृतिक रूप से नमक सुखाने की कला” को राष्ट्रीय स्तर की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की दूसरी सूची में शामिल किया गया । इसके बाद 2013 में, इन नमक खेतों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण स्थल घोषित किया गया और विश्व सांस्कृतिक विरासत की संभावित सूची में स्थान दिया गया। 1 जून, 2023 को छामदो शहर के मांगखांग प्राचीन नमक खेतों के संरक्षण संबंधी नियम औपचारिक रूप से लागू हुए। उच्च स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक फैली इस मजबूत संरक्षण व्यवस्था ने प्राचीन नमक के खेतों को सुरक्षा का एक अभेद्य कवच प्रदान किया है।