चीन ने दबाया “बफर बटन”, दिखाई बड़ी शक्ति की रणनीतिक दूरदर्शिता

वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हाल के दिनों में नौवहन की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार के पिछले रुझानों के अनुसार, जब भू-राजनीतिक संघर्षों से आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती है, तो प्रमुख उपभोक्ता देश अक्सर जल्दबाजी में खरीदारी बढ़ाने और भंडार जमा करने लगते हैं। इससे मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर और बढ़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आती है तथा ऊर्जा लागत के जरिए इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ता है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद, ऊर्जा की कीमतों में तेजी से वैश्विक आर्थिक सुधार पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई और कुछ समय के लिए कमोडिटी बाजार में “तेल की होड़” की आशंका भी पैदा हो गई।

लेकिन चीन के बाजार ने इसका अलग जवाब दिया। घरेलू तेल शोधन कंपनियों ने परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन की गति में बदलाव किया और ऊंची कीमत वाले कच्चे तेल की नई खरीद को लचीले और व्यवस्थित तरीके से धीमा किया। इससे मांग के स्तर पर आयात की वृद्धि की गति कम हुई। चीन ने बेहद संयमित तरीके से तनावपूर्ण वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन के लिए “बफर बटन” दबा दिया। “द वॉल स्ट्रीट जर्नल” ने एक लेख में कहा कि चीन द्वारा तेल आयात कम करने के कदम ने दबाव झेल रही विश्व अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण समर्थन दिया है। फ्रांस के “ले फिगारो” ने कहा कि 2008 के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के बाद यह दूसरी बार है, जब चीन ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लंबे समय से तेल संकट से निपटने के लिए दुनिया का मुख्य ध्यान आपूर्ति पक्ष पर रहा है और बड़े तेल उपभोक्ता देश आम तौर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव को निष्क्रिय रूप से सहन करने के लिए मजबूर रहे हैं। लेकिन इस बार के अनुभव से पता चलता है कि बहुत बड़े उपभोक्ता बाजार भी उत्पादन क्षमता में बदलाव और भंडार के प्रबंधन के जरिए बफर की भूमिका निभा सकते हैं और बाजार में संतुलन बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन सकते हैं। ब्रिटेन की समाचार एजेंसी “रॉयटर्स” के अनुसार, मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव बढ़ने के बाद चीन द्वारा कच्चे तेल की खरीद कम करने से मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के प्रभाव की काफी हद तक भरपाई हुई है। “फाइनेंशियल टाइम्स” ने भी टिप्पणी की कि चीन अब वैश्विक तेल बाजार में संतुलन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन रहा है।