चीलोंग भूस्खलन स्थल पर पहुंचकर CNN समेत विदेशी पत्रकार रह गए हैरान

“इस यात्रा से मुझे इस क्षेत्र की दुर्गमता और बचावकर्मियों के लिए राहत कार्य चलाने की कठिनाइयों का और भी गहरा एहसास हुआ… आपदा प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश करते ही चारों ओर धूल और घना कोहरा दिखाई दिया। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में बचाव वाहन मौजूद थे और जगह-जगह यातायात नियंत्रित करने वाले कर्मचारी तैनात थे। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और आवाजाही आसान बनाने के लिए वहां बजरी बिछाई गई थी।” 6 सितंबर को अमेरिकी समाचार नेटवर्क CNN के एक पत्रकार ने शीत्सांग के चीलोंग में आपदा राहत स्थल से भेजी अपनी रिपोर्ट में इन हालात का प्रभावशाली वर्णन किया।
5 से 6 सितंबर तक चीनी राज्य परिषद के प्रेस कार्यालय ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर विदेशी मीडिया के पत्रकारों को चीलोंग भूस्खलन आपदा स्थल का दौरा कराया। CNN, रॉयटर्स, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया और एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान समेत विदेशी मीडिया के पत्रकारों ने चीलोंग पहुंचने के बाद घटनास्थल से लगातार रिपोर्टें जारी कीं। वे इस आपदा की भीषण विनाशकारी क्षमता और बेहद कठिन बचाव परिस्थितियों को देखकर हैरान रह गए। कुछ विदेशी पत्रकारों ने बचावकर्मियों के अथक प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की और कहा कि उनका समर्पण बेहद भावुक कर देने वाला है।
चीलोंग के आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना अपने आप में एक बेहद कठिन यात्रा थी। विदेशी मीडिया के पत्रकारों ने इस सफर का भी विवरण दर्ज किया। शीत्सांग का क्षेत्र बहुत विशाल होने के कारण उन्होंने 5 सितंबर को ल्हासा से करीब आठ घंटे की सड़क यात्रा कर 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित तिंगरी काउंटी पहुंचे। इसके बाद तिंगरी से चीलोंग पहुंचने में उन्हें छह घंटे और लगे। चीन में तैनात पाकिस्तान समाचार एजेंसी के पत्रकार अस्कर ने इस अनुभव को साझा करते हुए ग्लोबल टाइम्स के पत्रकार से कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्र बेहद दुर्गम है और वहां पहुंचना बहुत मुश्किल है। यहां तक कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया टीम को भी वहां पहुंचने में डेढ़ दिन लग गया।

“सड़कें बह जाने के कारण हम केवल पैदल ही आपदा प्रभावित क्षेत्र के मुख्य हिस्से तक पहुंच सकते थे। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए हमें पहाड़ों और पानी के बीच से होकर काफी मुश्किल यात्रा करनी पड़ी।” चीन के एक बचावकर्मी ने विदेशी मीडिया के पत्रकारों को बताया, “जब हमने खुदाई शुरू की, तो वहां केवल इमारतों की नींव बची हुई थी। ऊपर बनी इमारतें पूरी तरह मलबे के साथ बह गई थीं। यह दृश्य देखकर दिल टूट गया। इस आपदा में हमारे इतने सारे लोगों ने अपनी अनमोल जान गंवा दी।”
चीलोंग सीमा चौकी कभी चीन और नेपाल के बीच व्यापार और आवागमन का एक महत्वपूर्ण मार्ग थी। 26 अगस्त को नेपाल में ग्लेशियर ढहने से हुई आपदा में यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ और अब भी सैकड़ों लोग लापता हैं। कीचड़ और भूस्खलन लगातार तलाश एवं बचाव अभियान में बड़ी बाधा बने हुए हैं। रॉयटर्स के पत्रकार ने घटनास्थल पर देखा कि चीनी बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। वहीं, भूस्खलन का खतरा, खराब मौसम और गहरी कीचड़ ने बचाव एवं पुनर्बहाली कार्य को और जटिल बना दिया है। CNN के अनुसार, पिछले 11 दिनों से जारी बचाव अभियान को भी द्वितीयक आपदाओं के खतरे के कारण कई बार बाधित होना पड़ा है। इनमें भूस्खलन और नए बने झीलनुमा अवरोधित जलाशय शामिल हैं। इसके अलावा, भारी बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार बचावकर्मियों के लिए हवाई साधनों से भी घटनास्थल तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
इन बेहद कठिन परिस्थितियों में अस्कर ने चीनी बचाव दलों के “बिना रुके काम करने” की सराहना की। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के पत्रकार मोकुंद ने भी कहा कि इस तरह के संकट से निपटने में चीन के पास काफी मजबूत क्षमता है। यहां बड़ी संख्या में प्रशिक्षित पेशेवर बचावकर्मी हैं और ऐसी आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्य के लिए विशेष मशीनरी भी उपलब्ध है। “हम बचाव अभियान में शामिल सभी लोगों को सलाम करते हैं। उनके प्रयास वाकई बेहद भावुक कर देने वाले हैं।”