चीन के राजदूत शू फ़ेईहोंग ने “द हिन्दू” में “ब्रिक्स की शक्ति, विश्व का सशक्तीकरण" शीर्षक से लेख प्रकाशित किया


7 सितंबर, 2026 को भारत में चीन के राजदूत शू फ़ेईहोंग ने “द हिन्दू” में “ब्रिक्स की शक्ति, विश्व का सशक्तीकरण" शीर्षक अपने नाम से एक लेख प्रकाशित किया।(भारत में चीन का दूतावास)

7 सितंबर, 2026 को भारत में चीन के राजदूत शू फ़ेईहोंग ने “द हिन्दू” में “ब्रिक्स की शक्ति, विश्व का सशक्तीकरण" शीर्षक अपने नाम से एक लेख प्रकाशित किया।

अपने लेख में शू फ़ेईहोंग ने लिखा कि विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार की गति कमजोर होने और संरक्षणवाद के प्रसार के बीच, कुछ देश बड़े पैमाने पर टैरिफ संबंधी बाधाएं खड़ी कर रहे हैं तथा आर्थिक अलगाव व आपूर्ति श्रृंखलाओं को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्था को नुकसान पहुँच रहा है। हमें यह समझना होगा कि आर्थिक वैश्वीकरण एक ऐसा ऐतिहासिक प्रवाह है जिसे रोका नहीं जा सकता। ब्रिक्स देशों को विश्व व्यापार संगठन पर केंद्रित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करनी चाहिए, सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र का दर्जा जैसी WTO की बुनियादी व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए, तथा हर प्रकार के संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए। इसके अलावा, हमें ऊर्जा, खनिज, बुनियादी ढाँचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग को मिलकर गहरा करना होगा ताकि एक खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था को बनाए रखा जा सके। चीन खुलेपन के माध्यम से सभी देशों के साथ नए अवसरों को साझा करने और साझा विकास हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है

ब्रिक्स देश निष्पक्षता व न्याय को बनाए रखने के “मुख्य बल” और एकजुटता तथा सहयोग को बढ़ावा देने के मुख्य आधार हैं। उन्हें विश्व शांति और विकास को बनाए रखने की जिम्मेदारी उठानी होगी। 2026 और 2027 में, भारत और चीन बारी-बारी से ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहे हैं। दोनों देशों के बीच बेहतर सहयोग “विस्तारित ब्रिक्स” सहयोग को सुदृढ़ और दीर्घकालिक बनाने के साथ-साथ विकासशील देशों के साझा हितों की रक्षा करने में मददगार साबित होगा।

2026 से दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में, चीन-भारत संबंधों में सुधार और विकास की सकारात्मक गति बनी हुई है। दोनों पक्षों ने हर स्तर पर संवाद को मजबूत किया है और विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान तथा सहयोग को आगे बढ़ाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। दोनों पक्षों के बीच 5 सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो चुकी हैं और 6 वर्षों के अंतराल के बाद सीमा व्यापार भी बहाल हो गया है। चीन, भारत के साथ मिलकर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के महत्वपूर्ण समझौतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने, अच्छे पड़ोसी व सच्चे मित्र तथा एक-दूसरे को आगे बढ़ाने वाले भागीदार बनने, और चीन-भारत संबंधों को निरंतर, स्वस्थ एवं स्थिर रूप से आगे बढ़ाने की उम्मीद करता है।