छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे: 20 सालों का जादुई और अद्भुत आकाश मार्ग


20 जुन को 2006 को, लहासा नदी रेलवे पुल पर चलती ट्रेन।(शिन्हुआ समाचार एचेंसी)

छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को शुरू हुए 20 साल पूरे हो चुके हैं। छिंगहाई प्रांत के शिनिंग शहर से शुरू होकर, गोलमुड से गुज़रते हुए ल्हासा तक पहुँचने वाला यह रेल मार्ग कुल 1956 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से 960 किलोमीटर से अधिक का हिस्सा औसतन 4000 मीटर से भी अधिक की ऊँचाई पर स्थित है। दुनिया की सबसे अधिक औसत ऊंचाई वाली रेलवे, दुनिया की सबसे लंबी पठारी रेलवे, और दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन—इसके बनाए ये विश्व रिकॉर्ड आज भी कोई तोड़ नहीं पाया है।

आज की छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे अपने नाम के अनुरूप एक “स्मार्ट आकाश मार्ग” बन चुकी है। पुरे रेल मार्ग पर कुल 3000 से अधिक कैमरे लगे हैं, जो ट्रेनों की आवाजाही पर लगातार और लाइव नज़र रखते हैं। तेज़ हवाओं वाले इलाक़ों में 52 निगरानी केंद्र बनाए गए हैं, जो “कान” बनकर हर हलचल को भाँप लेते हैं। वहीं 182 विशेष मॉनिटरिंग स्टेशन लगातार जमी हुई ज़मीन के तापमान और ज़मीन के धँसने की पल-पल की जानकारी देते हैं। इन हाइटेक और स्मार्ट उपकरणों की बदौलत हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा कंट्रोल और डिस्पैच सेंटर पूरे रेल नेटवर्क की हर गतिविधि पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है।

पिछले तिब्बती दवाओं को शीत्सांग से बाहर भेजने के लिए केवल हवाई जहाज़ का ही सहारा था, जो बेहद खर्चीला था और दवा कंपनियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता था। अब, ट्रेन से माल भेजने के कारण लागत में भारी कमी आई है और मुनाफे की गुंजाइश बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप, शीत्सांग शुंगबालाकु शीनशुई तिब्बती फार्मास्युटिकल कंपनी का सालाना राजस्व बढ़कर 6 करोड़ युआन तक पहुँच गया है। 


20 जुन को 2006 को, लहासा नदी रेलवे पुल पर चलती ट्रेन।(शिन्हुआ समाचार एचेंसी)

शीत्सांग आने वाली पर्यटन विशेष ट्रेनें एक के बाद एक लगातार चल रही हैं। वर्ष 2025 में, शीत्सांग आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ को पार कर गई, जिससे यहाँ के पर्यटन क्षेत्र ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है।

इस रेलवे ने पठार के अनगिनत निवासियों के लिए रोज़गार और आजीविका का मुख्य साधन बनी है, तथा उनके बेहतर भविष्य की ओर जाने वाली राह को आसान बनाया है। पिछले 20 वर्षों में, छिंगहाई-शीत्सांग के ज़रिए कुल 82.4 करोड़ टन माल की ढुलाई की गई और 10.4 करोड़ यात्रियों ने सफ़र किया, जिसमें शीत्सांग आने-जाने वाले 45 लाख से अधिक छात्र यात्री भी शामिल हैं।