चीन नवाचार का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचाना चाहता है: चीनी विदेश मंत्रालय
चीन दुनिया के सभी देशों के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मूर्त बुद्धिमत्ता जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में संवाद और सहयोग जारी रखना चाहता है। इसका मकसद नवाचार के लाभों को बढ़ावा देना और पूरी मानवता को इसका फायदा पहुंचाना है। यह बात चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने 25 अगस्त को पेइचिंग में आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
पेइचिंग में हाल ही में आयोजित 2026 विश्व रोबोट सम्मेलन को लेकर एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए लिन च्येन ने कहा कि रोबोट के खेलों में प्रतिस्पर्धा के अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मानवरूपी रोबोट तेजी से प्रयोगशालाओं से निकलकर औद्योगिक इस्तेमाल की ओर बढ़ रहे हैं। ये रोबोट न केवल कारखानों में पैकेज छांटने और पुर्जे जोड़ने जैसे काम कर सकते हैं, बल्कि समुदायों में बुजुर्गों की देखभाल और छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा में भी मदद कर सकते हैं। इतना ही नहीं, वे टेबल टेनिस खेलने और कपड़े तह करने जैसे बारीक शारीरिक काम भी कर सकते हैं।
लिन च्येन ने कहा कि यह उपलब्धि ओईएम, प्रमुख घटक निर्माताओं और एल्गोरिदम विकास टीमों के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। इसके पीछे चीन का लंबे समय से जारी स्थिर नीतिगत समर्थन, लगातार मजबूत हो रहा नवाचार आधारित विकास और अलग अलग क्षेत्रों में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि चीन में नई गुणवत्ता वाली उत्पादकता और वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने का मूल आधार कृत्रिम प्रतिबंधों, बंदिशों और एकाधिकार के बजाय खुलापन, सहयोग, पारस्परिक लाभ और साझा जीत रहा है। लिन च्येन ने कहा कि चीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मूर्त बुद्धिमत्ता जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में संवाद और सहयोग जारी रखने के लिए दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि चीन चाहता है कि “मेड इन चाइना” और “इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग इन चाइना” वास्तव में साझा विकास की ताकत बनें। इसके साथ ही, चीन तकनीक साझा करने, मानक तय करने और बाजार में सहयोग की संभावनाओं पर भी दूसरे देशों के साथ काम करने को तैयार है, ताकि नवाचार का लाभ बढ़े और पूरी मानवता को इसका अधिक से अधिक फायदा मिल सके।