एक संदेश बना बदलाव की शुरुआत, छुन्च्यांग समुदाय की बुज़ुर्गों तक गर्म भोजन पहुँचाने की पहल

सुबह 11 बजे, हांगचोउ शहर के शांगछंग जिले के छुन्च्यांग समुदाय स्थित “सुखद सहायक भोजन केंद्र” से ताज़ा भोजन की सुगंध फैलने लगी। अनेक बुज़ुर्ग एक-एक कर वहाँ पहुँचने लगे। कोई मेज़ के पास बैठकर बातचीत कर रहा था, तो कोई भोजन लेने की प्रतीक्षा में था। कुछ ही देर में गर्मागर्म भोजन की थालियाँ परोसी जाने लगीं और पूरा केंद्र चहल-पहल से भर उठा।

आज इस समुदाय के बुज़ुर्ग अपने घर के निकट ही गर्म भोजन का आनंद ले रहे हैं। लेकिन लगभग डेढ़ वर्ष पहले तक समुदाय के अनेक बुज़ुर्गों के लिए एक समय का सुविधाजनक भोजन भी सहज उपलब्ध नहीं था।

समुदाय के एक स्थानीय निवासी चू शूचियान बताते हैं, “पहले बुज़ुर्गों को भोजन के लिए निकटतम रेस्तरां तक पहुँचने के लिए लगभग एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था।” चू शूचियान समुदाय के सेवानिवृत्त निवासी हैं और तीन दशक से अधिक समय से पार्टी के सदस्य भी रहें हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने स्वयं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़े रखा। वे अक्सर आवासीय परिसर में घूमते, लोगों से मिलते-जुलते और पड़ोसियों के साथ बातचीत किया करते।

इसी दौरान उन्होंने देखा कि समुदाय में 60 वर्ष से अधिक आयु के 900 से अधिक बुज़ुर्ग रहते हैं, जिनमें से अनेक बुज़ुर्ग अकेले जीवनयापन कर रहें हैं। उनके लिए रोज़ भोजन बनाना कठिन था, जबकि बाहर जाकर खाना भी सुविधाजनक नहीं था। परिणामस्वरूप, “भोजन की व्यवस्था” समुदाय के बुज़ुर्गों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बन गई थी।

बुज़ुर्गों से बार-बार यह समस्या सुनने के बाद झू शूजियान ने इसे संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने का निर्णय लिया। उन्होंने जन-दैनिक ऑनलाइन के “नेतृत्व सुझाव एवं संदेश” मंच के द्वारा अपने सुझाव दर्ज कराते हुए समुदाय में बुज़ुर्गों के लिए सहायक भोजन केंद्र स्थापित करने की अपील की, और उनके सुझाव पर जल्द ही कार्रवाई शुरू हुई।

अगले ही दिन छुन्च्यांग समुदाय की पार्टी समिति के सचिव हे मू को यह संदेश प्राप्त हो हुआ। उन्होंने बताया, “वास्तव में यह संदेश मिलने से पहले ही हम बुज़ुर्गों के भोजन की समस्या के समाधान पर विचार कर रहे थे। लेकिन इस संदेश ने हमें यह एहसास कराया कि अब और प्रतीक्षा नहीं की जा सकती, इस योजना को जल्द से जल्द वास्तविकता में बदलना होगा।”

इसके तुरंत बाद हे मू और उनके सहयोगियों ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण शुरू किया। वे प्रत्येक परिवार से मिलकर बुज़ुर्गों की भोजन संबंधी दिनचर्या, उनकी प्रमुख चिंताओं, सहायक भोजन केंद्र की दूरी तथा भोजन के स्वाद और अन्य आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से जानकारी लेने लगे। परियोजना शुरू होने से पहले समुदाय ने 80 प्रतिशत से अधिक बुज़ुर्ग निवासियों से संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं का विस्तृत विवरण दर्ज किया। हालाँकि, सहायक भोजन केंद्र की स्थापना आसान नहीं थी।

छुन्च्यांग समुदाय में उपलब्ध स्थान सीमित था और खानपान संबंधी नियमों के कारण स्थल पर रसोई सहित पारंपरिक सामुदायिक भोजनालय स्थापित करना व्यावहारिक नहीं था। उपयुक्त समाधान खोजने के लिए हे मू और उनके सहयोगियों ने संपत्ति प्रबंधन इकाई, निवासी समिति, संबंधित विभागों तथा खानपान उद्यमों के साथ कई दौर की बैठकों और समन्वय के माध्यम से स्थल, भोजन वितरण, भोजन को गर्म बनाए रखने और मूल्य निर्धारण जैसे विषयों पर बार-बार विचार-विमर्श किया।

अंततः समुदाय ने “निकटवर्ती रसोई में केंद्रीकृत भोजन तैयार करना, उसे समुदाय तक पहुँचाना तथा स्थल पर गर्म रखकर परोसना” मॉडल अपनाते हुए “सुखद सहायक भोजन केंद्र” की स्थापना की। इस व्यवस्था से एक ओर स्थान और रसोई संबंधी सीमाओं का समाधान हुआ, वहीं दूसरी ओर बुज़ुर्गों को अपने घर के निकट ही गर्मागर्म भोजन उपलब्ध होने लगा।

योजना तय होने के बाद समुदाय ने उपयुक्त खानपान सेवा प्रदाता की तलाश शुरू की। जब यह जानकारी मिली कि चाओ मान को सामुदायिक भोजनालय के संचालन का अनुभव है, तो हे मू और उनके सहयोगियों ने स्वयं उनसे संपर्क किया।

शुरुआत में चाओ मान के मन में भी कुछ आशंकाएँ थीं। सहायक भोजन केंद्र में भोजन की ताज़गी बनाए रखने, किफायती मूल्य सुनिश्चित करने और बुज़ुर्गों के स्वाद एवं आहार संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखने के कारण लाभ की गुंजाइश सीमित थी। लेकिन हे मू और चू शूचियान के लगातार संपर्क एवं प्रयासों के साथ-साथ इस पहल को सफल बनाने के प्रति सरकारी विभागों की दृढ़ प्रतिबद्धता ने अंततः उनका दृष्टिकोण बदल दिया।

चू शूचियान द्वारा संदेश दर्ज कराने से लेकर “सुखद सहायक भोजन केंद्र” के औपचारिक रूप से शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया दो महीने से भी कम समय में पूरी हो गई। उद्घाटन के पहले ही दिन 200 से अधिक बुज़ुर्ग भोजन केंद्र पहुँचे। अपनी ओर से रखा गया सुझाव धीरे-धीरे साकार होकर बुज़ुर्गों के घर के निकट गर्म भोजन की सुविधा में बदलता देख चू शूचियान भावुक हो उठे।

कुछ ही समय में यह सहायक भोजन केंद्र बुज़ुर्गों का नया मिलन-स्थल बन गया। भोजन के बाद लोग तुरंत लौटने के बजाय वहीं बैठकर आपस में बातचीत करते, हालचाल पूछते और रोज़मर्रा की बातें साझा करते।

हालाँकि, भोजन केंद्र की स्थापना केवल पहला कदम था। उससे भी बड़ी चुनौती उसके दीर्घकालिक और स्थिर संचालन को सुनिश्चित करना थी। परीक्षण अवधि के दौरान खानपान सेवा प्रदाता को नकद लेन-देन, भोजन वितरण, सफाई और इस्तेमाल किए गए बर्तनों को समेटने जैसे कार्यों के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे श्रम लागत का दबाव बढ़ रहा था। भोजन केंद्र का संचालन लंबे समय तक सुचारु रूप से जारी रहे, इसके लिए समुदाय ने स्वयंसेवी सहयोग को जोड़ने की पहल की।

यह जानकारी मिलते ही चू शूचियान स्वयं आगे आए। उनका मानना था कि सहायक भोजन केंद्र की स्थापना भर पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके निरंतर संचालन की जिम्मेदारी भी सभी को मिलकर निभानी चाहिए। एक वरिष्ठ पार्टी सदस्य होने के नाते उन्होंने कहा कि जब समुदाय और बुज़ुर्गों को आवश्यकता हो, तो आगे बढ़कर सहयोग करना उनका दायित्व है।

इसके बाद उन्होंने पहल करते हुए एक स्वयंसेवी सेवा दल का गठन किया और समुदाय के स्वयंसेवकों को बारी-बारी से सहायक भोजन केंद्र में सेवाएँ देने के लिए संगठित किया। स्वयंसेवक वहाँ व्यवस्था बनाए रखने, भोजन वितरण में सहयोग करने तथा भोजन के बाद मेज़ों की सफाई जैसे कार्यों की जिम्मेदारी निभाने लगे।

आज सहायक भोजन केंद्र का संचालन धीरे-धीरे स्थिर हो चुका है, लेकिन समुदाय की सेवाएँ अब भी निरंतर जारी हैं। प्रतिदिन का भोजन मेन्यू बुज़ुर्गों के वीचैट समूह में साझा किया जाता है, जहाँ वे अपनी राय और स्वाद संबंधी सुझाव दे सकते हैं। वहीं, हे मू भी नियमित रूप से भोजन केंद्र का निरीक्षण कर भोजन की मात्रा, स्वच्छता और सेवा की गुणवत्ता की समीक्षा करते हैं तथा बुज़ुर्गों की अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी लेते हैं। प्रत्येक शनिवार स्वयंसेवक बिना किसी व्यवधान के 90 वर्ष से अधिक आयु के तथा चलने-फिरने में असमर्थ बुज़ुर्गों के घर जाकर भोजन पहुँचाते हैं।

एक संदेश से शुरू होकर एक सहायक भोजन केंद्र की स्थापना तक पहुँची यह यात्रा— चू शूचियान के सुझाव, हे मू और उनके सहयोगियों के समन्वित प्रयास, चाओ मान की प्रतिबद्धता तथा स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी—इस बात का उदाहरण है कि जनजीवन से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान विभिन्न पक्षों के संयुक्त प्रयासों से किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यह जनता की सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने वाली सामूहिक पहल का भी प्रतीक है।

छुन्च्यांग समुदाय के लिए “सुखद सहायक भोजन केंद्र” किसी कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक सतत प्रतिबद्धता की शुरुआत है: निवासियों की आवाज़ को निरंतर सुनना, बुज़ुर्गों की अपेक्षाओं का समय पर उत्तर देना और प्रत्येक ठोस पहल के माध्यम से जनसेवा की ऊष्मा को लोगों के घर-द्वार तक पहुँचाते रहना।
(चित्र जन-दैनिक ऑनलाइन से है)