"नए प्रकार के सैन्यवाद" के उदय को खतरे के रूप में दृढ़तापूर्वक रोकें: चीनी विदेश मंत्रालय

(CRI)09:17:34 2026-06-02


चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने 1 जून को एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने 1 जून को देश की राजधानी पेइचिंग में आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संवाददाता के प्रश्न के उत्तर में कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और विद्वानों ने पाया है कि जापान के हालिया गलत बयान और कार्य टोक्यो ट्रायल्स में उजागर हुई युद्ध की सैन्य तैयारियों से स्पष्ट रूप से मिलते-जुलते हैं, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए, संयुक्त रूप से रोकथाम करनी चाहिए और "नए प्रकार के सैन्यवाद" के उदय को एक गंभीर खतरे के रूप में दृढ़ता से रोकना चाहिए।

रिपोर्टों के अनुसार, जापान के रक्षा मंत्री ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला संवाद में चीन को परोक्ष रूप से जवाब देते हुए कहा कि एक देश के पास विशाल परमाणु शस्त्रागार और रणनीतिक बमवर्षक विमान हैं, जबकि जापान के पास इनमें से कुछ भी नहीं है, फिर भी उसे "नए प्रकार का सैन्यवाद" कहा जाता है। लिन च्येन ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि जापानी अधिकारी की यह टिप्पणी ऐतिहासिक, कानूनी, तथ्यात्मक और सांख्यिकीय तर्कों के सामने निराधार और कमजोर है, और एशियाई पड़ोसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं करती। 

उन्होंने कहा कि जापान का नवीनतम रक्षा बजट 90 खरब जापानी येन से अधिक हो गया है, जो लगातार 14वें वर्ष युद्धोत्तर काल का नया रिकॉर्ड है। प्रति व्यक्ति रक्षा व्यय चीन से तीन गुना अधिक है, और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में रक्षा व्यय बढ़कर 2% हो गया है, जिसे और बढ़ाकर 3.5% करने की योजना है। पिछले पांच वर्षों में जापान के रक्षा मंत्रालय के सैन्य ऑर्डर तीन गुना हो गए हैं। जब से जापान की मौजूदा सरकार सत्ता में आई है, उसने मध्यम और लंबी दूरी की आक्रामक मिसाइलों की तैनाती में तेजी लाई है, घातक हथियारों के निर्यात को उदार बनाया है, और संविधान एवं तीन सुरक्षा दस्तावेजों में संशोधन के लिए दबाव डाला है, ताकि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनों व विनियमों को और अधिक दरकिनार किया जा सके और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती दी जा सके।

लिन च्येन ने कहा, "यह जापानी अधिकारी जानबूझकर ऐतिहासिक जिम्मेदारी से बच रहा है और उपर्युक्त तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है, इसके बजाय वह दोष दूसरों पर डालने और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। क्या यह असुरक्षा का संकेत है, या अपनी सैन्य विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं को छिपाने का प्रयास है? ऐसी परिस्थिति में, जापान का तथाकथित 'संवाद' पाखंडी है, मात्र एक दिखावा और ढोंग है, जिसमें किसी भी प्रकार की ईमानदारी नहीं है।"