शीत्सांग चाआचाआ नूडल्स की हज़ारों वर्षों से चली आ रही परंपरा

चाआचाआ नूडल्स।
चाआचाआ नूडल्स, जिन्हें प्राचीन काल में “शुभ और लंबी उम्र देने वाले चाआचाआ नूडल्स” कहा जाता था, की शुरुआत ऐतिहासिक चाय-घोड़ा प्राचीन मार्ग पर होने वाले नमक और अनाज के व्यापार से हुई थी। यात्रा करने वाले घोड़ा कारवां और व्यापारी यहाँ विश्राम करने तथा नमक का व्यापार करने के लिए रुकते थे, जहाँ गरमा-गरम नूडल्स का एक कटोरा मेहमाननवाज़ी का सबसे उत्तम माध्यम बन गया। समय बीतने के साथ यह इस क्षेत्र का एक विशेष और प्रसिद्ध व्यंजन बन गया, जिसकी परंपरा आज लगभग एक हज़ार वर्षों से निरंतर चली आ रही है।

चाआचाआ नूडल्स।
पहले आटा कम और महँगा होता था, इसलिए आम परिवार केवल तिब्बती नववर्ष या विवाह जैसे बड़े अवसरों पर ही चाआचाआ नूडल्स खा पाते थे। लेकीन आज हालात बेहतर हो चुके हैं और लोग जब चाहें छोटे-छोटे कटोरों में बार-बार नूडल्स का आनंद ले सकते हैं। वर्ष 2010 में, चाआचाआ नूडल्स को स्वायत्त क्षेत्र स्तर की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया, जिससे इस पारंपरिक कला के संरक्षण और हस्तांतरण को एक स्पष्ट एवं सुदृढ़ पहचान मिली।