“चीन हमेशा सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाता रहा है”— शांगहाई सहयोग संगठन के महासचिव नूरलान येरमेकबायेव से बातचीत
25 साल पहले, शांगहाई में ह्वांगफू नदी के किनारे छह संस्थापक सदस्य देशों ने मिलकर एससीओ की स्थापना की थी, जिसने समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया अध्याय खोला। येरमेकबायेव ने कहा कि एससीओ अब 27 देशों को शामिल करने वाले एक बड़े परिवार के रूप में विकसित हो चुका है। यह विशाल भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है, बड़ी आबादी को जोड़ता है और इसमें आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। एससीओ के ढांचे के तहत सभी सदस्य देश राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार, संस्कृति आदि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं और मिलकर जोखिमों एवं चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
एससीओ के लगातार विकास और मजबूती का “राज़” क्या है ? इस सवाल के जवाब में येरमेकबायेव ने कहा, “दुनिया के सभी देशों, खासकर ग्लोबल साउथ के अधिकांश देशों के लिए, एससीओ के मूल्यों और विचारों में एक अनूठा आकर्षण है।” उनके अनुसार, आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, विभिन्न सभ्यताओं का सम्मान और साझा विकास की तलाश पर आधारित “शांगहाई भावना” ही एससीओ के निरंतर विकास और मजबूती की जीवनशक्ति है। एससीओ कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और न ही गुटबाजी की राजनीति करता है। यह गुटनिरपेक्षता, टकराव से बचने और किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाने के सिद्धांतों का पालन करता है तथा नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के निर्माण को बढ़ावा देता है। येरमेकबायेव ने कहा, “इसी वजह से अधिक से अधिक भागीदार एससीओ को राजनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाने, आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को मजबूत करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देख रहे हैं।”
एससीओ पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका नाम चीन के एक शहर के नाम पर रखा गया, जिसकी स्थापना में चीन ने भाग लिया और जिसका मुख्यालय भी चीन में है। येरमेकबायेव ने कहा कि एससीओ की स्थापना के बाद से चीन ने व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने वाली कई पहलें पेश की हैं और महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। 2025 में एससीओ का थ्येनचिन शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। “इसने सभी पर गहरी छाप छोड़ी। यह न केवल सबसे बड़े पैमाने का सम्मेलन था, बल्कि इसमें सहयोग के भी भरपूर परिणाम सामने आए।”
येरमेकबायेव ने बताया कि थ्येनचिन शिखर सम्मेलन के दौरान एससीओ के सदस्य देशों के नेताओं ने “एससीओ के अगले 10 वर्षों के विकास की रणनीति” को मंजूरी दी। उन्होंने इसे “एससीओ के अगले 10 वर्षों के सहयोग और विकास का मार्गदर्शक कार्य-ढांचा” बताया। शिखर सम्मेलन में एससीओ के संचालन तंत्र को और बेहतर एवं मजबूत किया गया। पर्यवेक्षक देशों और संवाद साझेदारों को मिलाकर एकीकृत “एससीओ साझेदार” व्यवस्था बनाई गई। सभी पक्षों के बीच राजनीतिक सहमति को मजबूत करते हुए एससीओ विकास बैंक की स्थापना की तैयारियों को आगे बढ़ाया गया। साथ ही, चार सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गए, जिससे नए खतरों और नई चुनौतियों से निपटने की सदस्य देशों की क्षमता व्यापक रूप से बढ़ेगी और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा की अधिक प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सकेगी।
येरमेकबायेव ने कहा कि वर्तमान में एससीओ के भौगोलिक दायरे, सदस्य देशों की संरचना, कार्यसूची और सहयोग के क्षेत्रों में गहरे बदलाव आए हैं। एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप जैसे नए मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं तथा कई नए सहयोग मंच भी स्थापित किए जा रहे हैं। चीन ने चीन–शांगहाई सहयोग संगठन ऊर्जा, हरित उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख सहयोग मंचों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार, उच्च शिक्षा और व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के तीन प्रमुख सहयोग केंद्रों की स्थापना की घोषणा की है। ये सभी एससीओ की दीर्घकालिक जरूरतों के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा, “इन मंचों और केंद्रों का सफलतापूर्वक स्थापित होकर प्रभावी रूप से काम करना चीन की सक्रिय भूमिका और महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।”
शांगहाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन जल्द ही शुरू होने वाला है। येरमेकबायेव ने बताया कि एससीओ के सभी पक्ष दुनिया को प्रभावित करने वाले विभिन्न मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा तथा खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित अर्थव्यवस्था जैसे उभरते रुझान भी चर्चा के प्रमुख विषय होंगे। उन्होंने कहा, “इस साल शांगहाई सहयोग संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ है। इस महत्वपूर्ण पड़ाव वाले वर्ष में “शांगहाई परिवार” को मिलकर प्रयास करना चाहिए और सहयोग के अधिक ठोस परिणाम सामने लाने चाहिए।”