एपिसोड 8: अगर पहाड़ और नदियां अगर अपनी रंगत खो दें, तो हम भविष्य को कैसे रोशन करेंगे?
“15वीं पंचवर्षीय योजना मिशन” की इस कड़ी में मुख्य पात्र मीना पिछले सात पड़ावों से हासिल किए गए विकास के सातों सूत्रों को जोड़कर आखिरकार “भविष्य के शहर” का रास्ता खोल लेती है। लेकिन उसके सामने मौजूद पहाड़, समुद्र और शहर सब कुछ बेरंग नजर आता है। गायब हो चुके रंगों को वापस लाने के लिए वह एक पारिस्थितिकी बहाली स्कैनर लेकर गहरे समुद्र में उतरती है और हाईटेक तकनीक के जरिए समुद्र के भीतर की जैविक दुनिया को “एक क्लिक में फिर से शुरू” करने की कोशिश करती है।
इस दौरान मीना की मुलाकात एक “प्रकृति संरक्षक” से होती है। उससे वह जमीनी स्तर पर काम करने वाले पारिस्थितिकी संरक्षण कर्मियों द्वारा नियमित गश्त, सर्वेक्षण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना के कार्यों के बारे में जानती है। धीरे-धीरे उसे समझ आता है कि तकनीक पारिस्थितिकी संरक्षण का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है, लेकिन वह लोगों की लंबे समय तक की जाने वाली निरंतर मेहनत और प्रतिबद्धता की जगह नहीं ले सकती। कड़ी के अंत में अंतिम रहस्य से पर्दा उठता है—पूरी यात्रा के दौरान मीना का मार्गदर्शन करने वाला “2030 का रहस्यमय संदेश” वास्तव में भविष्य की मीना ने ही भेजा था।
“15वीं पंचवर्षीय योजना” की रूपरेखा में कहा गया है कि “हरे पहाड़ और स्वच्छ जल अमूल्य संपदा हैं” की अवधारणा को दृढ़ता से अपनाया और व्यवहार में उतारा जाएगा। कार्बन उत्सर्जन के चरम स्तर और कार्बन तटस्थता के लक्ष्यों को दिशा-निर्देशक बनाकर तथा पारिस्थितिक सभ्यता की संस्थागत प्रणाली को मजबूत करने के आधार पर कार्बन उत्सर्जन में कमी, प्रदूषण में कमी, हरित क्षेत्र के विस्तार और आर्थिक वृद्धि को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। पारिस्थितिक पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार, पारिस्थितिक सुरक्षा की मजबूत ढाल तैयार करने तथा हरित विकास के लिए नई गति बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
