चीनी मार्शल आर्ट से मजबूत हो रहे हैं चीन-अफ्रीका के जनसंपर्क

30 जुलाई को प्रथम केन्या वुशु चैंपियनशिप में प्रतिभागी मुक्केबाजी स्पर्धा का प्रदर्शन करते हुए।
हाल ही में संपन्न हुई पहली केन्या वुशु चैंपियनशिप में आयोजकों ने घोषणा की कि विजेता खिलाड़ियों में से 3 से 5 किशोर खिलाड़ियों का चयन कर “केन्या यूथ ओलंपिक वुशु रिजर्व टीम” बनाई जाएगी। यह टीम इस वर्ष अक्टूबर से नवंबर के बीच सेनेगल में आयोजित होने वाले डकार यूथ ओलंपिक खेलों की तैयारी करेगी। इन खेलों में पहली बार वुशु को ओलंपिक श्रृंखला की आधिकारिक प्रतियोगिता के रूप में शामिल किया जाएगा।
केन्या के खेल स्टेडियमों से लेकर रवांडा के सामुदायिक चौकों, कैमरून के वुशु क्लबों और नाइजीरिया के खेल मैदानों तक, चीनी मार्शल आर्ट पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह अफ्रीका के अधिक से अधिक युवाओं के दैनिक जीवन का हिस्सा बनती जा रही है और चीन तथा अफ्रीका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने का नया माध्यम बन रही है।

30 जुलाई को प्रथम केन्या वुशु चैंपियनशिप में प्रतिभागी मुक्केबाजी स्पर्धा का प्रदर्शन करते हुए।
आज ऑगस्टीन जैसे अनेक अफ्रीकी युवा केवल वुशु के विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षक और इसके प्रचारक भी बन रहे हैं। इससे अफ्रीका में चीनी मार्शल आर्ट के विकास को नई ऊर्जा मिल रही है। वर्तमान में रवांडा में 30 से अधिक वुशु क्लब संचालित हैं और देशभर में लगभग 4,000 लोग वुशु का अभ्यास करते हैं। इनमें से करीब 50 स्थानीय प्रशिक्षकों ने रवांडा अथवा चीन में पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वहीं, कैमरून में कुंग-फू क्लबों से लेकर विश्वविद्यालयों के कन्फ्यूशियस संस्थान तक, बड़ी संख्या में युवा वुशु सीखने से जुड़ रहे हैं।
अनेक अफ्रीकी युवाओं के लिए चीनी मार्शल आर्ट की आकर्षक कलाएं ही इससे परिचय का पहला माध्यम बनती हैं। लेकिन इन तकनीकों के पीछे निहित स्वास्थ्य संबंधी अवधारणाएं, पूर्वी दर्शन और शिष्टाचार की संस्कृति उन्हें चीन को समझने की नई दृष्टि प्रदान करती हैं। कई अभ्यासकर्ताओं का कहना है कि प्रशिक्षण शुरू करने से पहले वे मार्शल आर्ट को केवल युद्धकला और आत्मरक्षा का साधन मानते थे। किंतु अभ्यास के साथ-साथ उन्होंने आत्मसंयम, अनुशासन, संतुलन और सामंजस्य जैसे मूल्यों को समझा और इनके पीछे निहित चीनी सांस्कृतिक दर्शन से भी परिचित हुए।

30 जुलाई को प्रथम केन्या वुशु चैंपियनशिप में प्रतिभागी मुक्केबाजी स्पर्धा का प्रदर्शन करते हुए।
प्रशिक्षण में गहराई आने के साथ अनेक अफ्रीकी युवाओं ने मार्शल आर्ट के पीछे निहित चीनी संस्कृति को जानने में भी रुचि दिखाई। “छी” (जीवन ऊर्जा), “रक्त प्रवाह” और “यिन-यांग” जैसी अवधारणाओं को समझने के लिए उन्होंने चीनी भाषा सीखी, पारंपरिक चीनी चिकित्सा का अध्ययन किया और चीनी संस्कृति से संबंधित पुस्तकें पढ़ीं। इस प्रकार मार्शल आर्ट की प्रत्येक मुद्रा और तकनीक के माध्यम से उनके लिए कभी दूर और रहस्यमयी लगने वाली चीनी संस्कृति अधिक सहज और समझने योग्य बन गई, जिससे समकालीन चीन के प्रति उनकी समझ भी अधिक व्यापक हुई।
इस प्रकार के आदान-प्रदान के विस्तार के साथ मार्शल आर्ट में निहित सांस्कृतिक मूल्य व्यक्तिगत अनुभव से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बन रहे हैं। नाइजीरिया स्थित चाइना कल्चरल सेंटर के कर्मचारी वांग श्यांग ने कहा कि मार्शल आर्ट के माध्यम से मित्रता स्थापित करने की प्रक्रिया में चीन और अफ्रीका के लोग अनुशासन, सम्मान और शांति जैसे साझा मूल्यों को सहज रूप से महसूस करते हैं, जिससे सांस्कृतिक समझ भावनात्मक निकटता में बदल जाती है। वहीं, केन्या कुंग-फू एवं वुशु महासंघ के अध्यक्ष एंजोंगे ने कहा कि “मार्शल आर्ट पूरी दुनिया को जोड़ने वाला एक पुल है। इस अनूठी सांस्कृतिक भाषा के माध्यम से अधिक से अधिक अफ्रीकी युवा चीन के करीब आ रहे हैं और उसे बेहतर ढंग से समझ रहे हैं।”