जापान परमाणु अप्रसार के दायित्वों का ईमानदारी से पालन करे: चीन
हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर 6 अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जापान को परमाणु अप्रसार से जुड़े अपने अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
दरअसल, एक पत्रकार ने सवाल किया कि 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया था, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध का अंत तेज हो गया। लेकिन 81 साल बाद जापान के दक्षिणपंथी समूहों पर सैन्यवाद को फिर से बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। सवाल में कहा गया कि जापान की सरकार सैन्य विस्तार कर रही है, "तीन अ-परमाणु सिद्धांतों" में बदलाव की कोशिश कर रही है, अमेरिका के साथ "परमाणु साझाकरण" की संभावना तलाश रही है और यहां तक कि स्वतंत्र परमाणु क्षमता हासिल करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। यह सब परमाणु हमले की त्रासदी झेल चुके जापानी लोगों की शांति की इच्छा के विपरीत माना जा रहा है। इस पर चीन की प्रतिक्रिया मांगी गई।
इसके जवाब में लिन च्येन ने कहा कि परमाणु हथियारों से होने वाली त्रासदी दोबारा कभी नहीं दोहराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिरोशिमा परमाणु बमबारी के ऐतिहासिक संदर्भ पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और जापानी सैन्यवाद की आक्रामकता तथा विस्तारवाद से मिले सबक को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जापान के दक्षिणपंथी तत्व ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। साथ ही, "परमाणु बम पीड़ित" की पहचान का राजनीतिक इस्तेमाल कर अंतर्राष्ट्रीय सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और पड़ोसी देशों पर जापानी आक्रमण से हुई करोड़ों लोगों की मौत और पीड़ा को जानबूझकर कम करके दिखाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि विडंबना यह है कि जापान की सत्तारूढ़ सरकार हाल के वर्षों में सैन्य विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है। साथ ही, वह अमेरिका से अपने लिए परमाणु सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग कर रही है तथा "तीन अ परमाणु सिद्धांतों" से हटने की कोशिश भी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से स्वतंत्र परमाणु क्षमता की बात किए जाने से "पुन: सैन्यीकरण" की महत्वाकांक्षा साफ दिखाई देती है। उनके मुताबिक, यह दोहरा रवैया दुनिया भर के शांतिप्रिय लोगों के लिए उकसावे जैसा है और ऐतिहासिक न्याय का भी अपमान है।
लिन च्येन ने कहा कि इस वर्ष टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ है और इतिहास का फैसला अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जापान को इतिहास का सम्मान करना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए, परमाणु अप्रसार से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए और इतिहास के कटघरे में दोबारा खड़ा होने जैसी स्थिति पैदा नहीं करनी चाहिए।