उच्च पठार पर हजारों सौर दर्पणों से हरित बिजली का उत्पादन

शीत्सांग खाएथोउ आनतुओ तुशो 100 मेगावाट सौर तापीय विद्युत स्टेशन।
करीब 8 लाख वर्ग मीटर में फैले दर्पण क्षेत्र में 15,927 हेलियोस्टैट चांदी जैसे सूर्यमुखी फूलों की तरह गोबी मरुस्थल में फैले हुए हैं। ये उच्च पठार की सूर्य किरणों को सटीक रूप से 210 मीटर ऊंचे ऊष्मा-अवशोषक टावर पर केंद्रित करते हैं। हाल ही में, दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित और शीत्सांग की पहली टावर प्रकार की सौर तापीय विद्युत परियोजना—शीत्सांग खाएथोउ आनतुओ तुशो 100 मेगावाट सौर तापीय विद्युत स्टेशन—में सभी हेलियोस्टैट दर्पणों की स्थापना पूरी हो गई है। इसके साथ ही परियोजना ने इस वर्ष अक्टूबर में ग्रिड से जुड़कर बिजली उत्पादन शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।
इस विद्युत स्टेशन का निर्माण शीत्सांग खाएथोउ समूह द्वारा निवेश कर किया जा रहा है। यह दुनिया का पहला टावर-आधारित सौर तापीय विद्युत स्टेशन है, जो अत्यधिक ऊंचाई, अत्यंत कम तापमान और अत्यंत कमजोर विद्युत ग्रिड वाले वातावरण में स्थापित किया गया है। स्थानीय क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2,800 घंटे से अधिक धूप मिलने वाले संसाधनों का लाभ उठाते हुए, परियोजना में पिघले हुए लवण आधारित टावर सौर तापीय प्रौद्योगिकी अपनाई गई है, जिससे “प्रकाश–ऊष्मा–विद्युत” ऊर्जा रूपांतरण को उच्च दक्षता के साथ साकार किया जा सके।
परियोजना के निर्माण के साथ ही जनजीवन के विकास को भी जोड़ा गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आय में अनुमानित 11.8 करोड़ युआन की वृद्धि होगी। विद्युत स्टेशन के संचालन में आने के बाद इसका वार्षिक औसत बिजली उत्पादन 25.5 करोड़ किलोवाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इससे हर वर्ष 60 हजार टन मानक कोयले की बचत होगी और 1.65 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह उत्तरी शीत्सांग विद्युत ग्रिड में स्थिर बिजली आपूर्ति की कमजोर कड़ी को दूर करने, स्थानीय ग्रामीण पुनरुत्थान को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र के हरित, निम्न-कार्बन और उच्च गुणवत्ता वाले विकास में मदद करेगा।