“चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता” का मूलभूत भ्रम

फ़ुजियान प्रांत के श्यामेन में यूरोप निर्यात के लिए शिपमेंट का इंतजार करते चीन-निर्मित नए ऊर्जा वाहन।(शिन्हुआ समाचार एचेंसी)
हाल में, कुछ देशों ने अपनी घरेलू औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में गिरावट और औद्योगिक खोखलेपन जैसी विकास संबंधी समस्याओं का ठीकरा चीन पर फोड़ते हुए,“अतिरिक्त उत्पादन क्षमता” के मुद्दे को उछालकर चीन के खिलाफ विभिन्न व्यापार प्रतिबंधात्मक उपाय लागू किए हैं। इस आर्थिक एवं व्यापारिक मुद्दे के राजनीतिकरण की गलत प्रवृत्ति के जवाब में, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने करीब 12,000 शब्दों वाला “तथाकथित ‘अतिरिक्त उत्पादन क्षमता’ मुद्दे पर चीन का रुख” नामक दस्तावेज जारी किया है। इसमें वस्तुनिष्ठ तथ्यों और विस्तृत आंकड़ों के आधार पर संबंधित गलत तर्कों का व्यापक विश्लेषण किया गया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मौजूद गलत धारणाओं को स्पष्ट किया गया है।
बाजार अर्थव्यवस्था के मूल तर्क के अनुसार, उत्पादन क्षमता की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन एक गतिशील प्रक्रिया है, जिसमें कोई स्थायी और अपरिवर्तनीय संतुलन स्थिति नहीं होती। इसलिए केवल अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव के आधार पर उत्पादन क्षमता को अतिरिक्त नहीं कहा जा सकता। वैश्विक स्तर पर उत्पादन क्षमता उपयोग दर के आकलन के लिए कोई एकीकृत मानक भी नहीं है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में इसका सामान्य उचित स्तर 75-80 प्रतिशत के बीच माना जाता है, जबकि विकासशील देशों में यह मानक अपेक्षाकृत कम होता है। वर्ष 2025 में चीन के निर्धारित आकार से ऊपर के औद्योगिक उद्यमों की क्षमता उपयोग दर 74.4 प्रतिशत रही, जो एक उचित दायरे में है। उच्च-स्तरीय विनिर्माण और उभरते उद्योगों में उत्पादन क्षमता का उपयोग विशेष रूप से प्रभावी रहा है। पारंपरिक उद्योगों में क्षमता उपयोग दर में आई अस्थायी गिरावट घरेलू औद्योगिक परिवर्तन और हरित उन्नयन की प्रक्रिया में हुए अल्पकालिक समायोजन का परिणाम है। अमेरिका के दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता आंकड़ों की तुलना में भी चीन के प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों की क्षमता उपयोग दर लंबे समय से स्वस्थ स्तर पर बनी हुई है।
दस्तावेज में “अतिरिक्त उत्पादन क्षमता” से जुड़े चार प्रमुख सामान्य भ्रमों को व्यवस्थित रूप से स्पष्ट किया गया है। पहला, औद्योगिक सब्सिडी का अर्थ अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देना नहीं है। दुनिया के सभी देश अनुसंधान एवं विकास सहायता, कर प्रोत्साहन जैसी नीतियों के माध्यम से उभरते उद्योगों को बढ़ावा देते हैं। उचित औद्योगिक नीतियां बाजार की कमियों को दूर कर हरित, निम्न-कार्बन और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास को गति दे सकती हैं। दूसरा, व्यापार अधिशेष को अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के बराबर नहीं माना जा सकता। यूरोप और अमेरिका के कई देशों के उच्च-स्तरीय विनिर्माण क्षेत्र लंबे समय से बड़े व्यापार अधिशेष बनाए हुए हैं। चीन ने कभी जानबूझकर व्यापार अधिशेष हासिल करने का लक्ष्य नहीं रखा। देश में आयात की वृद्धि दर लगातार बढ़ रही है और चीन में काम करने वाली विदेशी कंपनियां भी पर्याप्त लाभ कमा रही हैं, जिससे व्यापार अधिशेष में साझा लाभ और पारस्परिक जीत की स्थिति बनी है। तीसरा, तथाकथित “घरेलू मांग की कमी” वास्तविक स्थिति के विपरीत है। क्रय शक्ति समानता के आधार पर चीन पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा वस्तु उपभोग बाजार बन चुका है और भौतिक वस्तुओं की खपत के पैमाने पर विश्व में अग्रणी है। चौथा, पर्याप्त बाजार प्रतिस्पर्धा अव्यवस्थित उत्पादन विस्तार को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करती है। चीन में बाजार इकाइयों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है। अधिकांश विदेशी कंपनियां चीन में स्थिर लाभ हासिल कर रही हैं, जो देश में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा वाले बाजार वातावरण का प्रमाण है।
वैश्विक नई ऊर्जा उद्योग की लागत में भारी गिरावट चीन की औद्योगिक श्रृंखला में नवाचार और बड़े पैमाने पर उत्पादन से प्राप्त समावेशी लाभांश पर आधारित है। इससे सभी देश कम लागत वाली स्वच्छ ऊर्जा के विकास के परिणामों को साझा कर सकते हैं।
चीन द्वारा यह रुख दस्तावेज जारी करना केवल जनमत संबंधी बहस का जवाब देना नहीं है, बल्कि औद्योगिक श्रृंखला सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर साझा विकास को बढ़ावा देने की पहल है। वर्षों से चीन ने लगातार बाहरी दुनिया के लिए अपने बाजार को और खोला है, सक्रिय रूप से शुल्कों में कटौती की है, सेवा क्षेत्र में बाजार पहुंच को आसान बनाया है और व्यापारिक तनाव वाले प्रमुख उत्पादों के लिए निर्यात नीतियों को अनुकूलित किया है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयात बाजार और करीब 80 देशों के प्रमुख निर्यात बाजार के रूप में चीन ने बड़ी संख्या में विकासशील देशों के लिए शून्य शुल्क नीति लागू की है।
विभिन्न देशों के औद्योगिक प्रतिस्पर्धा स्तर में अंतर का मूल कारण उनके अपने औद्योगिक ढांचे और परिवर्तन की गति में अंतर है, न कि चीन का औद्योगिक विकास। चीन वैश्विक आपूर्ति और उपभोग—दोनों बाजारों की विशेषताओं से युक्त है। चीन का औद्योगिक विकास दुनिया के लिए प्रतिस्पर्धात्मक दबाव नहीं, बल्कि साझा विकास और प्रौद्योगिकी के व्यापक लाभ का नया अवसर लेकर आया है। सभी देशों को व्यापार संरक्षणवाद को त्यागना चाहिए, बहुपक्षीय नियमों के तहत बातचीत के माध्यम से मतभेदों का समाधान करना चाहिए और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग के जरिए वैश्विक आर्थिक विकास के अवसरों का विस्तार करना चाहिए।