अमेरिका की एआई जांच और प्रतिबंध की धमकी पर चीन की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका की ओर से चीनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंपनियों की जांच करने और उन पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दिए जाने के बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने 27 जुलाई को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से अमेरिका के उस रवैये का विरोध करता रहा है, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और व्यापार से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण और हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, अमेरिका निराधार आरोप लगाकर चीनी कंपनियों को बदनाम करता है और उन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है।
दरअसल, एक पत्रकार ने सवाल किया कि हाल ही में अमेरिका के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे चीनी एआई कंपनियों द्वारा अमेरिकी अत्याधुनिक मॉडलों के कथित "डिस्टिलेशन" की जांच करेंगे। साथ ही, "अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी" के आरोपों के आधार पर चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की भी बात कही है। इस पर चीन की क्या प्रतिक्रिया है?
इसके जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहा है कि चीनी एआई कंपनियों के मॉडल और अमेरिकी अत्याधुनिक मॉडल लगभग एक ही समय पर जारी किए गए थे। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में चीनी मॉडल पहले ही अग्रणी स्थिति हासिल कर चुके हैं। इसके बावजूद अमेरिका तथाकथित "डिस्टिलेशन" और "अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी" जैसे आरोप लगाकर चीनी कंपनियों को दबाने और उन पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दे रहा है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है, न ही इनके पीछे कोई कानूनी आधार है। इसके अलावा, इस पूरे मामले में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जो एआई के क्षेत्र में एकाधिकारवादी सोच को दर्शाता है।
प्रवक्ता ने आगे कहा कि चीन अमेरिका से आग्रह करता है कि वह दोनों देशों के उद्योग जगत की वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत आवाज सुने, अपनी एकाधिकारवादी सोच को बदले और चीनी कंपनियों को बदनाम करने तथा प्रतिबंधों की धमकी देना बंद करे। उन्होंने कहा कि यदि चीन के वैध अधिकारों और हितों को किसी भी तरह का वास्तविक नुकसान पहुंचाया गया, तो चीन अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। साथ ही, चीन को उम्मीद है कि अमेरिका दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बनी सहमति को ईमानदारी से लागू करेगा, चीन के साथ मिलकर आगे बढ़ेगा, एआई के क्षेत्र में संवाद और सहयोग को मजबूत करेगा तथा एआई के सकारात्मक और नैतिक विकास को बढ़ावा देते हुए वैश्विक एआई शासन को और बेहतर बनाएगा, ताकि दोनों देशों के साथ साथ पूरी दुनिया को इसका लाभ मिल सके।