पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सौर सेल की दक्षता में चीन की उल्लेखनीय प्रगति

पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सौर सेल। (चीनी विज्ञान अकादमी के रसायन विज्ञान संस्थान)
13 जुलाई को, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिका नेचर (Nature) ने अपने ऑलाइन संस्करण में चीन की सौर ऊर्जा (फोटोवोल्टिक) क्षेत्र में एक नई और उल्लेखनीय प्रगति प्रकाशित की। चीनी विज्ञान अकादमी के रसायन विज्ञान संस्थान के शिक्षाविद ली योंगफांग और शोधकर्ता मेंग लेई के नेतृत्व वाली टीम ने एक “पूर्ण-चरण विनियमन” रणनीति का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सौर सेल (perovskite-organic tandem solar cells) ने प्रकाश के प्रति संवेदनशील होने के बजाय प्रकाश को नियंत्रित करने की क्षमता हासिल कर ली है। इस तकनीक के साथ प्रमाणित स्थिर-अवस्था फोटोइलेक्ट्रिक रूपांतरण दक्षता (certified steady-state photoelectric conversion efficiency) 28.04% तक पहुँच गई है, जिसने इस प्रकार के उपकरणों की दक्षता में एक नया वैश्विक रिकॉर्ड बनाया है।
इस नए प्रकार का टैंडम सौर सेल अगल-अलग तरंग दैर्ध्य (wavebands) के सूर्य प्रकाश को बिजली में बदलने के लिए मिलकर काम करता है, जिससे यह पारंपरिक सिंगल-जंक्शन सौर सेल की सैद्धांतिक दक्षता सीमा को पार करने में सक्षम है। यह कागज की तरह पतला, हल्का और लचीला है। भविष्य में, इससे न केवल इमारतों के कांच और कारों की सनरूफ पर लगकर बिजली उत्पादन किया जा सकेगा, बल्कि ड्रोन, पहनने योग्य उपकरणों और यहाँ तक कि अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए भी हल्का और पोर्टेबल ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराया जा सकेगा।
टीम द्वारा विकसित पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सौर सेल को एक तीसरे पक्ष के संस्थान द्वारा प्रमाणित किया गया है, जिसके अनुसार इसकी स्थिर-अवस्था फोटोइलेक्ट्रिक रूपांतरण दक्षता 28.04% तक पहुँच गई है। इसने इस प्रकार के उपकरणों की दक्षता में एक नया वैश्विक रिकॉर्ड बनाया है। इसके साथ ही, इस उपकरण की स्थिरता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो लगातार 625 घंटे तक प्रकाश के संपर्क में काम करने के बाद भी अपनी प्रारंभिक दक्षता का 90% बनाए रखने में सक्षम है।
चीनी विज्ञान अकादमी के शिक्षाविद और रसायन विज्ञान संस्थान के शोधकर्ता ली योंगफांग ने बताया कि पेरोव्स्काइट-ऑर्गेनिक टैंडम सौर सेल हल्का होने, लचीलेपन और उच्च विशिष्ट शक्ति के फायदों से लैस हैं। इनका उपयोग न केवल इमारतों, परिवहन और पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जमीनी क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जा सकता है, बल्कि ये उपग्रहों, अंतरिक्ष स्टेशनों और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे एयरोस्पेस क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यह तकनीक ऊर्जा ढांचे के और अधिक परिवर्तन तथा पृथ्वी के सतत विकास के लिए एक नया वैज्ञानिक और तकनीकी मार्ग प्रदान करने की उम्मीद जगाती है।