"दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट का निर्णय" असल में कानूनी वेश में सिर्फ़ एक राजनीतिक तमाशा है: चीनी विदेश मंत्रालय

(CRI)09:57:25 2026-07-15

रिपोर्ट के अनुसार, 13 जुलाई को चीन के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में 'दक्षिण चीन सागर सुरक्षा गोलमेज सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर 'दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट के निर्णय' से जुड़ी भ्रांतियों को सिरे से खारिज कर दिया।

इसके बाद, 14 जुलाई को चीन की राजधानी पेइचिंग में हुई एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने संवाददाताओं के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने साफ़ कहा कि "दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट का निर्णय" असल में कानूनी वेश में सिर्फ़ एक राजनीतिक तमाशा है।

उन्होंने आगे कहा कि यह अवैध "निर्णय" इस ऐतिहासिक सच को नहीं बदल सकता कि दक्षिण चीन सागर और उसके आसपास के द्वीपों पर चीन की संप्रभुता, संप्रभु अधिकार और क्षेत्राधिकार हैं। यह चीन के अपनी संप्रभुता और समुद्री अधिकारों व हितों की रक्षा करने के मजबूत संकल्प को डिगा नहीं पाएगा। साथ ही, इससे सीधे तौर पर जुड़े देशों के साथ बातचीत और आपसी सलाह-मशविरे से विवादों को सुलझाने की चीन की नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रवक्ता के मुताबिक, चीन इस पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्रीय समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए इस इलाके के देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

जब उनसे पूछा गया कि 12 जुलाई को कुछ यूरोपीय देशों ने अमेरिका, फ़िलीपींस और अन्य देशों के साथ मिलकर इस फैसले की 10वीं वर्षगांठ पर एक संयुक्त बयान जारी किया है, और यूरोपीय संघ ने भी इससे संबंधित एक बयान जारी किया है, तो इस पर चीन की क्या टिप्पणी है? इसके जवाब में प्रवक्ता लिन च्येन ने कहा कि ये बयान तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और चीन को बदनाम करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश हैं। चीन इस पर अपनी कड़ी असंतुष्टि और कड़ा विरोध दर्ज कराता है।

उन्होंने दोहराया कि "दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पंचाट के निर्णय" के मामले पर चीन का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट और दृढ़ रहा है। तथाकथित "मध्यस्थता न्यायाधिकरण" को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जल्दबाजी में गठित किया गया था, जिसके पास कोई कानूनी अधिकार या निष्पक्षता नहीं है। यह "निर्णय" अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और कुछ पश्चिमी देशों द्वारा चीन को नियंत्रित करने की राजनीति का एक हिस्सा मात्र है। चीन न तो इस फैसले को मान्यता देता है और न ही इस पर आधारित किसी भी दावे या कार्रवाई को स्वीकार करता है।