बंजर तट से हरित नखलिस्तान तक: यानी आर्द्रभूमि का पारिस्थितिक कायाकल्प

यानी राष्ट्रीय आर्द्रभूमि पार्क।
शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश स्थित यानी राष्ट्रीय आर्द्रभूमि पार्क का कुल क्षेत्रफल 8738 हेक्टेयर है, जिसमें से विभिन्न प्रकार की आर्द्रभूमियों का क्षेत्रफल 5373 हेक्टेयर है। यह पठारी क्षेत्र में जैव विविधता का एक प्रमुख समृद्ध केंद्र और प्रवासी जलपक्षियों के लिए सर्दियों का एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है। इसके साथ ही, यह चीन के दक्षिण-पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र की पारिस्थितिक सुरक्षा की एक के लिए महत्वपूर्ण रक्षा रेखा के रूप में अहम भूमिका निभाता है।
कोई सोच भी नहीं सकता कि आज चारों ओर हरियाली से आच्छादित यह बर्फीला नखलिस्तान एक दशक से भी पहले धूल भरी आंधियों से जूझता हुआ एक बंजर तट था। यानी आर्द्रभूमि के संरक्षक फुंतसोक त्सेरिंग ने पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा, "पहले लोग पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं देते थे। नदी के तट पर हर तरफ कचरा फैला रहता था और नाममात्र के ही कुछ पेड़ थे। जब नदी का जलस्तर बढ़ता था, तो खेत पूरी तरह पानी में डूब जाते थे।"
यानी आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक पर्यावरण में बदलाव की शुरुआत साल 2009 में इसके एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में निर्माण के साथ हुई थी। पेड़-पौधे लगाने से यहाँ धूल भरी आंधियों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। साल 2016 में, यानी राष्ट्रीय आर्द्रभूमि पार्क प्रबंधन ब्यूरो के आधिकारिक तौर पर गठन के बाद से, अब तक कुल 17.6 करोड़ युआन का निवेश किया जा चुका है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे के निर्माण, पारिस्थितिक बहाली और वैज्ञानिक अनुसंधान एवं पारिस्थितिक निगरानी जैसे प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए किया गया है, जिससे आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक पर्यावरण में लगातार सुधार हो रहा है।
वर्ष 2016 से, स्थानीय सरकार ने यानी आर्द्रभूमि में नदी के किनारे लगभग 86 हेक्टेयर भूमि पर अल्पाइन पाइन और विलो जैसे विभिन्न प्रकार के पेड़ लगाए हैं। न्यिंगची शहर के बायी जिले के वानिकी और घास का मैदान ब्यूरो के निदेशक च्यांग वेनताओ ने कहा, "हम 'जहाँ जंगल के अनुकूल हो वहाँ पेड़ लगाने, और जहाँ घास के अनुकूल हो वहाँ घास उगाने' के सिद्धांत पर कायम हैं। आसपास के कई ग्रामीण रेत नियंत्रण, वनीकरण और आर्द्रभूमि संरक्षण के काम में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।"
हाथ में कचरा बैग और चिमटा लिए, फुंतसोक त्सेरिंग आर्द्रभूमि के रास्तों पर चलते हुए एक तरफ कचरा उठाते हैं, तो दूसरी तरफ रास्ते के दोनों किनारों पर लगे पेड़ों की बढ़त पर भी नज़र रखते हैं। 63 वर्षीय फुंतसोक त्सेरिंग को इस आर्द्रभूमि संरक्षक के रूप में काम करते हुए 7 साल हो चुके हैं। फुंतसोक त्सेरिंग ने कहा, "हमारे दैनिक काम में कचरा साफ करना, जंगली जानवरों को बचाना, यह देखना कि पेड़ों में कोई बीमारी या कीड़े तो नहीं लग रहे हैं, और यह जांचना शामिल है कि कहीं कोई अवैध शिकार या अवैध रूप से रेत-पत्थर का खनन तो नहीं कर रहा है।"
यानी आर्द्रभूमि में, फुंतसोक त्सेरिंग की तरह कुल 75 संरक्षक हैं। ये सभी साल के बारह महीने अपने-अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में मुस्तैदी से काम करते हैं और मिलकर इस खूबसूरत नखलिस्तान की रक्षा कर रहे हैं।