छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे:पठारीय क्षेत्रों की समृद्धि और विकास को बढ़ाने की "आर्थिक धमनी"

छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे HXN3। (VCG)
1 जुलाई, 2026 को दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित और सबसे लंबी पठारीय रेलवे लाइन - छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे के पूर्ण खंड के यातायात के 20 वर्ष पूरे होंगे। "स्काई रोड" के रूप में प्रसिद्ध यह रेलमार्ग न केवल विश्व इंजीनियरिंग इतिहास में एक चमत्कार का सृजन कर चुका है, बल्कि पठारीय क्षेत्रों की समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने वाली "आर्थिक धमनी" भी बन गया है।
छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग छिंगहाई प्रांत के शिनिंग शहर से शीत्सांग के ल्हासा तक 1956 किलोमीटर लंबा है। इसके संचालन ने माल परिवहन लागत को लगभग दो-तिहाई कम कर दिया है, परिवहन समय 48 घंटों के भीतर सीमित हो गया है, और संचयी परिवहन मात्रा 10 करोड़ टन पार कर चुकी है, जिससे पठारीय विशेष उत्पादों की बाहरी बिक्री और अन्य क्षेत्रों के सामग्रियों के शीत्सांग आयात को मजबूत गति मिली है। रेलवे ने लोगों के आवागमन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया है, जो पठार और अन्य क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु बन गया है।
20 वर्षों के दौरान, रेलवे का लगातार उन्नयन होता रहा है, विद्युतीकृत माइलेज 2391 किलोमीटर तक पहुंच गया है, और शीघ्र ही पूर्ण रेलवे विद्युतीकृत संचालन का लक्ष्य प्राप्त होगा। साथ ही, ल्हासा-शिगात्से और ल्हासा-लिंगची रेलवे लाइनों के क्रमिक रूप से यातायात के लिए खुलने से पठारीय रेलवे नेटवर्क में निरंतर सुधार हो रहा है। जो क्षेत्रीय समन्वित विकास के लिए एक मजबूत परिवहन समर्थन प्रदान करता है।