क्या चीन की तकनीकी प्रगति विदेशी कंपनियों की “देन” है?

हाल ही अमेरिकी समाचार पत्र द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में दावा किया कि एप्पल जैसी बहुत सारी बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने बड़ी मात्रा में व्यावहारिक प्रौद्योगिकी, मशीनरी, उत्पादन प्रक्रियाएं तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन चीन को उपलब्ध कराए, जिससे उसे आवश्यक संसाधन प्राप्त हुए और दुर्लभ मृदा चुंबकों, सौर सिलिकॉन वेफरों, इस्पात तथा दवा उद्योग जैसे क्षेत्रों में अग्रणी स्थिति हासिल करने में सहायता मिली। ऐसे में प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या चीन का विकास और उसकी तकनीकी प्रगति विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा “दिए” किए गए संसाधनों का परिणाम है? वास्तव में यह तर्क न केवल तथ्यहीन है, बल्कि अत्यंत अहंकारी और भ्रामक भी है। इसके पीछे पश्चिम-केंद्रित सोच रखने वाले कुछ विश्लेषकों और टिप्पणीकारों की वह मानसिकता झलकती है, जो वैश्विक आर्थिक एवं तकनीकी परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस कर रहे है।

सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने प्रारंभिक दौर में चीन के बाजार में प्रवेश क्यों किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी के निवेश और व्यावसायिक विस्तार का मूल उद्देश्य अधिकतम लाभ अर्जित करना तथा व्यावसायिक जोखिमों को न्यूनतम रखना होता है। इन कंपनियों ने अनेक विकासशील देशों की तरह चीन में भी पूंजी, तकनीक और प्रबंधन अनुभव के बदले विशाल उपभोक्ता बाजार, कम लागत वाली आपूर्ति श्रृंखला तथा बेहतर लाभ के अवसर प्राप्त किए। चीन में उनका निवेश किसी परोपकारी भावना या उदार सहायता का परिणाम नहीं था, बल्कि स्पष्ट व्यावसायिक हितों और आर्थिक गणनाओं पर आधारित एक रणनीतिक निर्णय था। इसलिए उन्हें चीन के विकास का “उपकारक” या “दाता” के रूप में प्रस्तुत करना वस्तुस्थिति का सरलीकरण और इतिहास की गलत व्याख्या है।

दूसरा, किसी भी अर्थव्यवस्था के उभार और दीर्घकालिक विकास का मूल आधार उसकी आंतरिक क्षमता तथा बाहरी दुनिया के साथ उसके सकारात्मक और संतुलित संबंध होते हैं, जिनमें आंतरिक कारक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा प्रस्तुत यह तर्क कि चीन की तकनीकी प्रगति मुख्यतः विदेशी कंपनियों द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का परिणाम है, जो की वास्तविकता से मेल नहीं खाता। इसके विपरीत, चीन ने कुछ देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रौद्योगिकी निर्यात प्रतिबंधों और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधात्मक उपायों के बीच आत्मनिर्भरता, निरंतर अनुसंधान तथा व्यवस्थित नवाचार के बल पर तकनीकी विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू होने के बाद के चार दशकों से अधिक समय में चीन की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई है। हालांकि, केवल विदेशी निवेश की उपस्थिति से यह नहीं समझाया जा सकता कि अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने चीन में वह सफलता हासिल की, जो कई मामलों में अन्य देशों अथवा उनके अपने घरेलू बाजारों में भी देखने को नहीं मिली। निस्संदेह, इसके पीछे चीन द्वारा उद्यमों के लिए निर्मित अनुकूल विकास वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा-संपदा, विशाल एवं दक्ष विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र, तीव्र गति से विकसित होती आधारभूत संरचना और लॉजिस्टिक आपूर्ति शृंखला, विशाल तथा निरंतर विस्तार करता उपभोक्ता बाजार तथा सुधार एवं खुलेपन की नीति से प्राप्त मजबूत नीतिगत लाभ इसके प्रमुख आधार रहे हैं। यही कारण है कि बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था, स्थिर कारोबारी माहौल और समावेशी विकास मॉडल के सहारे अनेक विदेशी कंपनियों ने चीन में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्हें अन्यत्र दोहराना आसान नहीं माना जाता।

वास्तव में, चीन में सफलता प्राप्त करने वाली अधिकांश विदेशी कंपनियों और चीन के बीच संबंध परस्पर निर्भरता तथा साझा विकास पर आधारित रहे हैं। उदाहरण के लिए, एप्पल ने तीन दशकों से अधिक समय से चीन में अपनी उपस्थिति बनाए रखी है। इस दौरान कंपनी ने लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े उद्योगों में नवाचार को भी प्रोत्साहित किया है। दूसरी ओर, चीन न केवल एप्पल के लिए एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता बाजार के रूप में उभरा है, बल्कि उसकी विशाल और दक्ष औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला ने कंपनी के उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि दीर्घकालिक, स्थिर और पूर्वानुमेय सहयोग संबंधों की आधारशिला पारस्परिक लाभ और साझा सफलता होती है; उन्हें किसी एक पक्ष द्वारा लगातार किए जाने वाले एकतरफा त्याग या रियायतों के बल पर कायम नहीं रखा जा सकता।

अंततः, आर्थिक वैश्वीकरण का वास्तविक स्वरूप देशों और बाजारों के बीच गहरे परस्पर जुड़ाव में निहित है। ऐसे समय में जब संरक्षणवाद, एकपक्षीय नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों में वृद्धि देखी जा रही है, चीन ने खुलेपन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार बनाए रखा है। यही कारण है कि निवेश की स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के अवसर तलाशने वाली विदेशी कंपनियों के लिए चीन एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में बनकर उभरा है। जैसे-जैसे चीन “विश्व की विनिर्माण कार्यशाला” से आगे बढ़कर नवाचार आधारित विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, वैसे-वैसे उसका उच्च स्तरीय खुलापन भी और व्यापक होता जा रहा है। इस प्रक्रिया में चीन विभिन्न देशों की कंपनियों का स्वागत करता रहेगा, ताकि वे समानता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर चीन की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में भागीदारी करें तथा उच्च गुणवत्ता वाले विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ साझा कर सकें।