पिछले 20 वर्षों में लारू आर्द्रभूमि के जलक्षेत्र में 232 प्रतिशत की वृद्धि


लारू आर्द्रभूमि। (VCG)

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा के लारू राष्ट्रीय आर्द्रभूमि प्रकृति संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन ब्यूरो द्वारा हाल ही में पारिस्थितिकी निगरानी रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 20 वर्षों में लारू आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिसमें जलक्षेत्र के दायरों में लगभग 232 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, रेतीले और निर्विकसित भूमि में 70 प्रतिशत की कमी आई, जबकि वनस्पति सूचकांक में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गयी। इसके अलावा, काले गर्दन वाले सारस, सफेद होंठ वाले हिरण, ऊदबिलाव और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के बार-बार दिखाई देने की घटनाएँ भी बढ़ी हैं।

लारू आर्द्रभूमि को छिंगहाई–शीत्सांग पठार में स्थित सबसे बड़े शहरी प्राकृतिक दलदली इलाके के रूप में जाना जाता है। यह क्षेत्र जल संरक्षण, जलवायु नियंत्रण और जैव विविधता बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिकाएँ निभाता है। ल्हासा नगर प्रशासन द्वारा दलदली क्षेत्रों के संरक्षण और सुधार में “संरक्षण सर्वोपरि, सख्त प्रबंधन, प्रणालीगत प्रबंधन, वैज्ञानिक पुनरुद्धार और उचित उपयोग” के सिद्धांतों को अपनाते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण और पुनरुद्धार को निरंतर बढ़ावा दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दलदली क्षेत्र में जैव विविधता लगातार समृद्ध हो रही है। वर्तमान में यहाँ 438 प्रजातियों के संवहनी पौधे तथा 174 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए हैं, जबकि प्रजनन करने वाले जलपक्षियों की संख्या 1 से बढ़कर 12 प्रजातियों तक पहुँच गई है। साथ ही, राष्ट्रीय द्वितीय श्रेणी संरक्षण प्राप्त मछलियों की 3 नई प्रजातियों की भी पहचान की गई है।