नई पीढ़ी के युवा बने कुइचोउ के दुर्लभ सुनहरे लंगूरों के रक्षक
चीन के कुइचोउ प्रांत के फानचिंगशान पर्वत की तलहटी में वांग चिन का दिनचर्या देखने में साधारण प्रतीत होता है। वह प्रतिदिन सुबह जंगल से ताज़ी पत्तियां एकत्र करते हैं, समय पर इस क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ सुनहरे लंगूरों के लिए फल और सब्जियां तैयार करते हैं तथा उनके भोजन, गतिविधियों और स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं। लेकिन दुनिया में केवल लगभग 850 की संख्या में बचे इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण की जिम्मेदारी उनके कार्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बना देती है। “पृथ्वी का इकलौता संतान” कहे जाने वाले सुनहरे लंगूर केवल कुइचोउ प्रांत के फानचिंगशान क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। इनके संरक्षण का अर्थ केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समय के साथ चल रही एक महत्वपूर्ण संरक्षण मुहिम में भागीदारी भी है।
फानचिंगशान पर्वत प्रबंधन ब्यूरो के सुनहरे लंगूर अनुसंधान केंद्र में कार्यरत युवा संरक्षक वांग चिन प्रत्येक लंगूर की आदतों और स्वभाव से भली-भांति परिचित हैं। कौन अधिक प्रभावशाली है, किसका भोजन दूसरे छीन लेते हैं और किसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है, इसकी उन्हें पूरी जानकारी रहती है। एक लंगूर “छियेनबाओ” को आराम से भोजन मिल सके, इसके लिए कभी-कभी उन्हें उसे “खांगखांग” (एक लंगूर का नाम) से अलग भी रखना पड़ता है।
रोज़ाना उन्हें भोजन कराना, उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना और उनकी देखभाल करना —वांग चिन का यह दैनिक कार्य उन्हें फानचिंगशान के पर्वतीय वनों में मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का साक्षी बनाता है। उनके लिए यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रमों, पारिस्थितिक गलियारों के निर्माण और चौबीसों घंटे संचालित स्मार्ट निगरानी प्रणाली के माध्यम से इस दुर्लभ प्रजाति के लिए अधिक सुरक्षित आवास तैयार किया जा रहा है। वांग चिन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल सुनहरे लंगूरों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि फानचिंगशान की समृद्ध और विशिष्ट जैव विविधता को संरक्षित करना तथा मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व की इस कहानी को आगे बढ़ाना भी है।
