असंगत कथन और कर्म जापान के "पुनःसैन्यीकरण" के बारे में अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को दूर नहीं कर सकते: चीनी विदेश मंत्रालय

(CRI)10:38:41 2026-05-27

जापानी अधिकारियों के इस बयान के जवाब में कि उनकी विशेष रूप से "केवल रक्षात्मक" नीति अपरिवर्तित है, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने 26 मई को आयोजित नियमित संवाददाता सम्मेलन में जापान की सिलसिलेवार सैन्य गतिविधियां सूचीबद्ध कीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कथनी और करनी में विरोधाभास जापान के "पुनः सैन्यीकरण" को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को दूर नहीं कर सकता।

रिपोर्टों के अनुसार, जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने हाल ही में कहा कि जापान की "केवल रक्षात्मक" नीति अपरिवर्तित है, जापान के "नए प्रकार के सैन्यवाद" के बारे में चीन का दावा निराधार है, और युद्ध के बाद एक शांतिपूर्ण राष्ट्र के रूप में जापान का मार्ग नहीं बदलेगा।

इस पर चीनी प्रवक्ता ने कहा कि जापान के कथनों से अधिक उसके कार्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हाल के वर्षों में, जापानी सरकार ने लगातार सैन्य खर्च बढ़ाया है, घातक हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील दी है, लगातार सैन्य अभ्यासों में भाग लिया है, लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती को बढ़ावा दिया है, सक्रिय आक्रमण में सक्षम तथाकथित "प्रतिघात क्षमता" का निर्माण किया है, बड़ी मात्रा में संवेदनशील परमाणु सामग्री का भंडार किया है, शांतिवादी संविधान में संशोधन के लिए दबाव डाला है, और खुद को "युद्ध-सक्षम" राष्ट्र के रूप में प्रचारित किया है, साथ ही लगातार अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनों और नियमों का उल्लंघन किया है। क्या इसका मतलब यह है कि "केवल रक्षात्मक" नीति अपरिवर्तित रहेगी? जापान के सैन्यवाद ने विश्व को गहरा दुख पहुंचाया और जापानी जनता पर विपत्तियां लाईं। "नए प्रकार का सैन्यवाद" भी एक ऐसा मार्ग है जिससे वापसी असंभव है। चीन जापान से आग्रह करता है कि वह इतिहास से सीख ले, अपनी शांति प्रतिबद्धताओं का पालन करे और अपने एशियाई पड़ोसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाए।