शाननान: हिमालय की गोद में बसा “तिब्बती रहस्यमय क्षेत्र”


यमद्रोक झील।

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा से दक्षिण-पूर्व दिशा में लगभग 100 किलोमीटर आगे बढ़ते ही यारलुंग त्संगपो नदी की घाटी धीरे-धीरे विस्तृत होने लगती है। दोनों किनारों पर हरे-भरे इलाके फैले हुए हैं, जहाँ जौ के खेत और विलो के वृक्ष एक-दूसरे के साथ बिछे दिखाई देते हैं। यही है शाननान शहर, जिसे “शीत्सांग का रहस्यमय प्रदेश” भी कहा जाता है। स्थानीय भाषा में “लोका” के नाम से जाने वाला शाननान का अर्थ है दक्षिण या दक्षिणी क्षेत्र। यालोंग नदी दक्षिणी पर्वतीय इलाकों से निकलकर यारलुंग त्संगपो नदी में मिलती है, जिससे दोनों नदियों के संगम पर एक उपजाऊ डेल्टा का निर्माण हुआ है। औसतन लगभग 3700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित शाननान, प्रकृति की अद्भुत कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है। समुद्र तल से मात्र 110 मीटर की ऊँचाई वाली शिपाशियाछु घाटी से लेकर 7554 मीटर ऊँचे कुला गांगरी पर्वत तक फैला यह क्षेत्र लगभग 70 गुना ऊँचाई के अंतर को समेटे हुए है, जो चारों ऋतुओं में बदलते अद्भुत पारिस्थितिक दृश्य प्रस्तुत करता है।


यह शीत्सांग का पहला महल — युंगबुलाकांग है।

यारलुंग त्संगपो नदी मानो रेशमी पट्टी की तरह पश्चिम से पूर्व तक शाननान को चीरती हुई बहती है और अपने दोनों किनारों पर बिखरी प्राकृतिक सुंदरता को एक सूत्र में पिरोती है। दक्षिण की ओर हिमालय पर्वतमाला विराट रूप में दिखाई देती है, जहाँ गहरी घाटियाँ और घुमावदार दर्रे पहाड़ों और घने वनों के बीच से होकर गुजरते हैं। रास्ता भले ही कठिन और दुर्गम प्रतीत होता है, किंतु आगे बढ़ते ही अचानक दृश्य खुलकर सामने आ जाता है। वहीं उत्तर में गंगदिसे पर्वतमाला एक विशाल नाग के समान फैली हुई है, जिसके बीच यमद्रोक झील और झेगु झील जैसे सुंदर जलाशय सजे हुए हैं। इन झीलों का निर्मल जल दर्पण की भाँति आसपास की हिमाच्छादित चोटियों और बहते बादलों का प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है।


यह शाननान के नैदोंग जिले के मेनझोंगगांव समुदाय में बसंत बुवाई समारोह है।

शाननान शहर के नायतोंग ज़िले के चाशी तंगछु समुदाय में कलाकारों की ऊँची और दीर्घ स्वर लहरियों वाली तिब्बती ओपेरा की गूंज पूरे वातावरण में सुनाई देती है। वे भव्य परिधान धारण किए, रंग-बिरंगे मुखौटे पहने, सशक्त नगाड़ों की ताल पर प्राचीन नृत्य-चालों के साथ मंचन करते दिखाए देते हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो एक के बाद एक पारंपरिक तिब्बती नाट्य प्रस्तुतियाँ जीवंत हो उठ रही हों। इस समुदाय के प्रमुख तथा राष्ट्रीय स्तर के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के प्रतिनिधि उत्तराधिकारी निमा त्सेरिंग के अनुसार, “इतिहास की दृष्टि से यहाँ की तिब्बती ओपेरा परंपरा सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है।” इसी कारण चाशी तंगछु को “तिब्बती ओपेरा का प्रथम गाँव” भी कहा जाता है।

दक्षिण की ओर आगे बढ़ते हुए लगभग 5000 मीटर ऊँचे रिला पर्वत को पार करने पर यूमाई घाटी हिमालय की दक्षिणी ढलानों में गहराई से स्थित दिखाई देती है। यहाँ वर्षा प्रचुर मात्रा में होती है, घने आदिम वन सूर्य के प्रकाश को लगभग ढक लेते हैं, ऊँचे-ऊँचे प्राचीन वृक्ष खड़े हैं और बीच-बीच में बहती जलधाराएँ कल-कल ध्वनि करती हैं। यह दृश्य इस उच्चभूमि के विस्तृत और विरल भूभाग से बिल्कुल भिन्न प्रतीत दिखाई पड़ता है। एक समय में यूमाई कभी भारी हिमपात के कारण बाहरी दुनिया से कट गया था, और लंबे समय तक यहाँ केवल सांग्जे छूपा का तीन-सदस्यीय परिवार ही निवास किया करते थें, जो 3644 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की की देखभाल भी किया करते रहें । इसी कारण यह स्थान “तीन व्यक्तियों का गाँव” के नाम से भी जाना जाता हैं।

जब यारलुंग त्संगपो नदी पर सांझ उतरती है, तब संध्या के समय चौक पर मधुर कुओचुआंग नृत्य की धुन धीरे-धीरे गूंज उठती है और स्थानीय लोग लयबद्ध कदमों से नृत्य करने लगते हैं। पहली खेती की शुरुआत से लेकर लोकतांत्रिक सुधारों तक, तिब्बती ओपेरा की परंपरा से लेकर यूमाई की रक्षा तक, यह रहस्यमय भूमि निरंतर जीवन्त रही है और अपनी विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती रही है।