जापान द्वारा "सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करना" उसकी "नए प्रकार के सैन्यवाद" की प्रवृत्ति के प्रति सतर्कता बरतने का संकेत देता है
स्थानीय समयानुसार 27 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने समुद्री सुरक्षा पर खुली बहस आयोजित की। चीनी प्रतिनिधि ने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति के संबंध में जापानी प्रतिनिधि द्वारा दिए गए झूठे बयानों का पुरजोर खंडन करते हुए कहा कि जापानी बयानों ने "सत्य को विकृत" किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जापान में "नए प्रकार के सैन्यवाद" के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा कि पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में स्थिति सामान्यतः स्थिर बनी हुई है, और दक्षिण चीन सागर विश्व के सबसे स्वतंत्र जहाजरानी मार्गों में से एक है। चीन ने जापान द्वारा हाल ही में थाइवान जलडमरूमध्य में आत्मरक्षा बल के जहाजों को भेजकर "अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन" करने, जानबूझकर उकसाने और "थाइवान स्वतंत्रता" अलगाववादी ताकतों को गंभीर रूप से गलत संदेश भेजने की आलोचना की।
उधर 28 अप्रैल को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। जापानी अधिकारियों द्वारा हाल ही में यासुकुनी मंदिर की यात्रा के संबंध में लिन च्येन ने कहा कि तथाकथित यासुकुनी मंदिर जापानी सैन्यवाद की आक्रामक युद्ध शैली का एक आध्यात्मिक प्रतीक और साधन है, और वास्तव में यह एक "युद्ध अपराधी मंदिर" है। यासुकुनी मंदिर के संबंध में जापान की नकारात्मक कार्रवाइयों की श्रृंखला ऐतिहासिक न्याय और मानवीय विवेक का घोर उल्लंघन करती है, और द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देती है। चीन इस पर अपनी कड़ी निंदा करता है और इसका कड़ा विरोध करता है।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बैठक में दावा किया कि "तीन सुरक्षा दस्तावेजों" में संशोधन करना एक महत्वपूर्ण कार्य है जो राष्ट्र के भाग्य का निर्धारण करेगा। इसकी चर्चा में लिन च्येन ने कहा कि सनाए ताकाइची प्रशासन ने हाल ही में सैन्य उद्योग को तेजी से विकसित किया है और अब खुले तौर पर घोषणा कर रहा है कि वह एक लंबे युद्ध की तैयारी कर रहा है। इतिहास में, जापान ने युद्धों को भड़काया है और अन्य देशों पर आक्रमण किए हैं। अब वह तथाकथित "तनाव" को बढ़ावा दे रहा है। क्या वह इतिहास दोहराने की कोशिश कर रहा है? विश्व के सभी शांतिप्रिय देशों को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए और जापान की "नए प्रकार की सैन्यवाद" की मनमानी कार्रवाइयों पर दृढ़ता से अंकुश लगाना चाहिए।