कुलांगयू द्वीप : विरासत, पर्यटन और कूटनीति का अनोखा संगम


कुलांगयू द्वीप के खूबसूरत समुद्र तट का नजारा।

हाल ही में मुझे चीन के फुचियन प्रांत के शियामन में स्थित कुलांगयू द्वीप जाने का अवसर मिला जहाँ मैंने इस अनोखी द्वीप के इतिहास से लेकर वर्तमान के चीजों का अनुभव किया। इस द्वीप पर घुमने के दौरान मुझे पता चला की इसे “पियानो द्वीप” के नाम से भी जाना जाता है, और वर्ष 2017 में इसे UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया। यहाँ भ्रमण करने के दौरान मैंने पाया यहाँ के मकानों की बनावट चीनी, दक्षिण-पूर्व एशियाई और यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मैंने एक अनोखी चीज और अनुभव किया कि इस द्वीप पर न तो कारें चलती हैं और न ही साइकिल, जिससे यहाँ का वातावरण शांत और मानवीय गति के अनुरूप बना रहता है। कुछ स्थानिये लोगों से बातचीत के दौरान मुझे मालूम चला की 19वीं सदी के अंत में यह एक अंतरराष्ट्रीय बस्ती के रूप में विकसित किया गया, जहाँ कई देशों के कांसुलेट भी स्थापित किये गए थे, और इसी कारण यहाँ की वास्तुकला में गोथिक चर्चों से लेकर पारंपरिक मिनान घरों तक का अनूठा मेल दिखाई देता है, जो इसे “विश्व स्थापत्य प्रदर्शनी” का स्वरूप प्रदान करती है। मैंने यह भी अनुभव किया कि यह द्वीप आधुनिक चीनी संगीतकारों का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है और यहाँ एशिया के सबसे बड़े ऑर्गन संग्रहालयों में से एक स्थित है, जिसमें दुर्लभ वाद्य यंत्र संरक्षित हैं।

कुछ समय तक बातचीत करने के बाद एक स्थानीय युवक ने मुझे द्वीप के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए आमंत्रित किया। वहाँ मैंने तीन प्रमुख स्थानीय पकवानों का अनुभव किया—पहला शाछामियन, जो फ़ुजियान शैली का नूडल सूप है और विशेष “शाछा सॉस” (सीफूड व मूंगफली आधारित) से तैयार किया जाता है। दूसरा, ताज़े ऑयस्टर से बना प्रसिद्ध ऑमलेट हैली जियान, और तीसरा स्वादिष्ट फिश बॉल सूप। भोजन के पश्चात हमने यहाँ की प्रसिद्ध मिनान शैली के “कोंगफू चाय” का आनंद लिया, जहाँ चाय बनाने और परोसने की पारंपरिक विधि अत्यंत आकर्षक ढंग से प्रस्तुत की गई। इसके बाद पैदल चलते हुए संकरी गलियों में घूमना अपने आप में एक अलग अनुभव रहा, जहाँ यूरोपीय और पारंपरिक चीनी वास्तुकला का सुंदर मेल स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।


कुलांगयू द्वीप के स्थानीय व्यंजन: उपर से, फिश बॉल सूप, हैली जियान और शाछा नूडल्स।

कुलांगयू द्वीप अंतरराष्ट्रीय संतार दृष्टि से भी अब नई पहचान गढ़ता दिखाई दे रहा है। भ्रमण के दौरान मैंने पाया कि इस ऐतिहासिक द्वीप पर BRICS देशों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच प्रशासनिक सहयोग, सांस्कृतिक संवाद और नीति-निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करना है। यह केंद्र भारत सहित BRICS देशों के अधिकारियों और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहाँ वे विकास, शहरी प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर अनुभव साझा कर सकते हैं।


कुलांगयू द्वीप स्थित ब्रिक्स देशों का सीमा शुल्क प्रशिक्षण केंद्र।

समुद्र तट पर बैठकर लहरों की मधुर ध्वनि और आसपास गूंजते संगीत के सुरों के अनोखे मेल को महसूस करते हुए मुझे यह अहसास हुआ कि कुलांगयू द्वीप अब केवल एक सामान्य पर्यटन स्थल नहीं रहा, बल्कि चीन की अर्थव्यवस्था में एक प्रभावशाली सॉफ्ट-पावर और सांस्कृतिक-व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। स्थानीय लोगों से संवाद के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि शियामन बंदरगाह के समीप स्थित यह द्वीप वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित कर सेवा क्षेत्र, आतिथ्य उद्योग और स्थानीय हस्तशिल्प बाजार को नई मजबूती प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, विविध सांस्कृतिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से यह द्वीप चीन के पर्यटन-आधारित व्यापार और वैश्विक आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा और गति दे रहा है।


कुलांगयू द्वीप के तट से गुजरता हुआ हुंडई मालवाहन जहाज।

अंत में, कुलांगयू द्वीप को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में देखना इसकी वास्तविक पहचान को सीमित करना होगा। यह एक सजीव द्वीप है, जहाँ आज भी स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक जीवन शैली के साथ सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। यहाँ की यात्रा सिर्फ दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक व्यापक अनुभव में बदल जाती है, जहाँ इतिहास हर मोड़ पर महसूस होता है, संस्कृति जीवंत रूप में सामने आती है और साधारण जीवन भी अपनी गहराई में अत्यंत समृद्ध प्रतीत होता है।

(चंदन सिंह , जन-दैनिक ऑनलाइन)