ल्हासा में तिब्बती भाषा और लिपि आधारित पहला प्रदर्शनी भवन खुला
24 अप्रैल को शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में चीन का पहला तिब्बती भाषा और लिपि आधारित विशेष प्रदर्शनी भवन—शीत्सांग तिब्बती भाषा एवं लिपि संग्रहालय—का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी भवन शैक्षणिक अनुसंधान, शिक्षण-प्रशिक्षण और सांस्कृतिक प्रसार को एक साथ समाहित करता है, जहाँ 3,000 से अधिक प्रदर्श सामग्री संग्रहीत हैं।
यह संग्रहालय ऐतिहासिक विकास को आधार बनाते हुए तैयार किया गया है, जिसमें तिब्बती भाषा और लिपि की उत्पत्ति एवं विकास, अध्ययन और उपयोग, तथा संरक्षण और संवर्धन जैसे तीन प्रमुख विषयों के अंतर्गत कुल 10 खंड स्थापित किए गए हैं। इन खंडों के माध्यम से तिब्बती लिपि के निर्माण से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी में उसके उपयोग तक की विकास यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया गया है, साथ ही विभिन्न जातीय समूहों के बीच संवाद, आदान-प्रदान और समन्वय को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को भी प्रभावी रूप से दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनी भवन में चीन सरकार द्वारा प्रकाशित शीत्सांग संबंधी कई विस्तृत आधिकारिक दस्तावेजों को आधार बनाकर तिब्बती भाषा और लिपि के क्षेत्र में हुए विकास को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से शीत्सांग के शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद, सरकार के सतत समर्थन और संरक्षण के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में प्राप्त बहुआयामी प्रगति और ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है।
इस अवसर पर शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के तिब्बती भाषा कार्य समिति (अनुवाद एवं संकलन ब्यूरो) के सेवानिवृत्त अधिकारी और वरिष्ठ अनुवादक त्सेरिंग डुंडुप ने कहा कि, “तिब्बती भाषा और लिपि, तिब्बती संस्कृति की मूल धारा है और चीनी राष्ट्र की साझा सांस्कृतिक धरोहर के भंडार में एक चमकता हुआ रत्न भी है।” उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय का उद्घाटन उनके लंबे समय से संजोए गए स्वप्न के साकार होने जैसा है। उनके अनुसार, यह केवल प्रदर्शनी का केंद्र नहीं, बल्कि तिब्बती भाषा के अध्ययन, अनुसंधान, संरक्षण और विकास का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो इसके संवर्धन में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।