चीन में खोजी गई पहली चंद्र उल्कापिंड से महत्वपूर्ण खोजें सामने आईं

चंद्र उल्कापिंड Pakepake005। (चीन भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण)
चीन द्वारा खोजी गई पहली चंद्र उल्कापिंड ने चंद्रमा की दो महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक घटनाओं का खुलासा किया है और एक नए चंद्र खनिज की भी पहचान की गई है।
2026 के विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर, चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत चीन भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने “Pakepake005” से जुड़े नवीनतम अनुसंधान परिणाम जारी किए। यह उल्कापिंड वर्ष 2024 में चीन के शिनजियांग स्थित ताकलामकान मरुस्थल में पाया गया था। अंतरराष्ट्रीय उल्कापिंड विज्ञान समिति की नामकरण समिति द्वारा इसे चंद्र अवशिष्ट कोणीय ब्रेशिया (लूनर ब्रेक्सिया) के रूप में मान्यता दी गई, जिससे चीन में स्थानीय स्तर पर चंद्र उल्कापिंड की खोज का अभाव समाप्त हुआ।
अनुसंधान के अनुसार, यह उल्कापिंड चंद्रमा पर हुई कम से कम दो प्रमुख भू-वैज्ञानिक घटनाओं का साक्ष्य प्रस्तुत करता है। पहली घटना लगभग 3.92 अरब वर्ष पूर्व हुई प्रसिद्ध ‘इम्ब्रियम बेसिन’ टक्कर है, जिसने चंद्र सतह के स्वरूप को पुनर्गठित किया। दूसरी घटना लगभग 3.49 अरब वर्ष पूर्व अत्यंत निम्न-टाइटेनियम बेसाल्टिक मैग्मा गतिविधि से जुड़ी है। इस प्रकार की विशिष्ट ज्वालामुखीय क्रिया यह दर्शाती है कि उस समय चंद्रमा का आंतरिक भाग अब भी अत्यंत उष्ण था और ज्वालामुखीय गतिविधियां सक्रिय थीं।
चंद्र उल्कापिंड वे पिंड होते हैं, जो चंद्र सतह पर क्षुद्रग्रहों या अन्य खगोलीय पिंडों की तीव्र टक्करों के दौरान अंतरिक्ष में उछलकर पृथ्वी तक पहुंचते हैं। इनमें विभिन्न चंद्र पदार्थ टूटकर, मिश्रित होकर और पुनः जुड़कर समग्र शैल का निर्माण करते हैं, जो चंद्रमा के विभिन्न चरणों और स्रोतों से जुड़े विकासक्रम का महत्वपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत करते हैं।