छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग से माल परिवहन का आंकड़ा 10 करोड़ टन के पार

चीन रेलवे छिंगहाई-शीत्सांग ग्रुप कंपनी लिमिटेड से प्राप्त जानकारी के अनुसार, छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग के पूर्ण रूप से संचालन में आए 20 वर्षों के दौरान शीत्सांग में आने-जाने वाले रेल माल परिवहन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। 13 अप्रैल 2026 तक,इस रेलमार्ग के जरिए शीत्सांग आने-जाने वाले माल का कुल परिवहन 10 करोड़ टन के आंकड़े को पार कर चुका है।

छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग का पूर्ण संचालन 1 जुलाई 2006 से शुरू हुआ, जिससे शीत्सांग में रेल सेवा की कमी का दौर खत्म हो गया। पिछले दो दशकों में शीत्सांग से आने-जाने वाले माल परिवहन में निरंतर वृद्धि और नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। वर्ष 2006 में जहां यह आंकड़ा केवल 3.61 लाख टन था, वहीं 2025 के अंत तक यह बढ़कर 83.13 लाख टन हो गया, जो औसतन 18 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। इनमें शीत्सांग जाने वाले माल की मात्रा 2006 के 3.4 लाख टन से बढ़कर 2025 में 69.08 लाख टन तक पहुंच गई, जिसकी औसत वार्षिक वृद्धि दर 17.2 प्रतिशत रही। वहीं शीत्सांग से बाहर भेजे जाने वाले माल का आंकड़ा 2006 के 21 हजार टन से बढ़कर 2025 में 14.05 लाख टन हो गया, जो 24.8 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।

जैसे-जैसे माल परिवहन की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है, वैसे-वैसे छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग के माल परिवहन क्षमता में भी निरंतर उछाल देखी जा रही है, और इस महत्वपूर्ण रेलवे नेटवर्क के बुनियादी ढांचे में सुधार-कार्य निरन्तर किया जा रहा है। एक प्रमुख माल परिवहन मार्ग के रूप में, छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग का गोलमुद-ल्हासा रेलखंड अपनी शुरुआत के बाद से निरंतर उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अनेक सुधार किये हैं, जिनमें स्टेशनों की संख्या का बढ़कर 58 होना, ट्रैक्शन क्षमता का 2880 टन तक बढ़ाया जाना, और यात्री एवं मालगाड़ियों की संख्या 17 जोड़ी तक बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा, माल परिवहन नेटवर्क की निरंतर विस्तार प्रक्रिया भी जारी है। ल्हासा-शिगात्से रेलवे और ल्हासा-लिंगची रेलवे की छिंगहाई-शीत्सांग रेलमार्ग से जुड़ने के साथ ही एक “Y” आकार के रेलवे मुख्य नेटवर्क का निर्माण किया गया है। बता दें कि अब तक शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में रेलवे संचालन की कुल दूरी 1000 किलोमीटर को पार कर चुकी है, और माल परिवहन से संबंधित स्टेशनों की संख्या 5 तक पहुंच गई है, जिससे इस प्रदेश में रेलवे की पहुंच और प्रभावक्षेत्र को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं।