ऊर्जा संकट ने परिवर्तन को तेज किया, चीन का अनुभव वैश्विक दक्षिण की मदद कर सकता है: चीन के जलवायु परिवर्तन विशेष दूत
हाल ही में वियना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एवं जलवायु मंच में चीन के जलवायु परिवर्तन के विशेष दूत ल्यू चनमिन ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के आयात पर अत्यधिक निर्भरता बहुत जोखिम भरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए और ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।
ल्यू ने बताया कि चीन का अनुभव यह दिखाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा का विकास, ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन को मजबूत करने का एक प्रभावी तरीका है। उन्होंने यह भी माना कि ऊर्जा संकट के कारण अल्पावधि में कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है, लेकिन दीर्घावधि में यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
पेरिस समझौते के तहत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए, ल्यू ने कहा कि सभी देशों को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए ऊर्जा परिवर्तन की गति बढ़ानी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकासशील देशों के लिए यह प्रक्रिया विकसित देशों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में, यदि दुनिया को इस सदी के मध्य तक कार्बन तटस्थता हासिल करनी है, तो विकसित देशों को लगभग 2040 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि विकासशील देशों के लिए आवश्यक अवसर और समय मिल सके।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले पांच वर्ष वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। एक विकासशील देश के रूप में चीन, वैश्विक दक्षिण के देशों को उनके ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में सहयोग देने के लिए तैयार है। इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकसित देशों के साथ नए द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग मॉडल विकसित करने की दिशा में काम करेगा।