छिंगमिंग के सुनहरे मौसन का मजेदार आकर्षण


छिंगमिंग में लोग प्रकृति की सैर भी करते हैं। (शिन्हुआ समाचार एचेंसी)

चीनी पारंपरिक पंचांग के 24 ऋतु-चक्रों में, छिंगमिंग एकमात्र ऐसा विशेष पर्व है, जिसकी पहचान एक साथ ऋतु-चक्र और त्योहार दोनों के रूप में होती है। इस दिन पूर्वजों की कब्रों की सफाई करने और उन्हें याद करने की परंपरा शामिल है। चूंकि इस समय वसंत की अच्छी धूप होती है, इसलिए लोग इसी बहाने प्रकृति की सैर भी करते हैं। इसी से मनोरंजन की कई अन्य परंपराएं, जैसे कि फुटबॉल (एक प्राचीन चीनी गेंद-खेल जिसे छुचू भी कहा जाता है) खेलना, झूला झूलना और पानी के किनारे खेल खेलना जैसी विविध मनोरंजन गतिविधियों विकसित हुईं।


कायफ़ेंग शहर के "छिंगमिंग शांगहे युआन" (Qingming Shanghe Park)। (शिन्हुआ समाचार एचेंसी)

जब कायफ़ेंग शहर के "छिंगमिंग शांगहे युआन"(Qingming Shanghe Park) में कदम रखते हैं, तो नदी के दोनों किनारों पर नई ताज़ी हरी घास और पत्तियां दिखाई देती हैं और लंबे इन्द्रधनुषी पुल पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहाँ पारंपरिक जुलूस, मुर्गों की लड़ाई, फुटबॉल जैसे प्राचीन खेल एक के बाद एक चलते रहते हैं। वसंत की इन हवाओं में आज भी हज़ारों साल पुराने बाज़ार की वही जीवंत रौनक महसूस होती है।

"उत्तरी सोंग राजवंश के समय में, चाहे बच्चे हों, बूढ़े हों, पुरुष हों या महिलाएं—सभी अपने बालों में फूल सजाते थे। उस दौर में यह बहुत लोकप्रिय और शालीन फैशन माना जाता था। छिंगमिंग शांगहे युआन पार्क के मार्केटिंग विभाग के एक अधिकारी ने पत्रकार को बताया कि छिंगमिंग की छुट्टियों के दौरान हमने इसी सुंदरता को फिर से जीवंत किया है, ताकि पर्यटकों को ऐसा महसूस हो जैसे वे उत्तरी सोंग काल में वापस लौट गए हैं।"  


छात्र शहीदों के स्मारक पर फूल चढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।(शिन्हुआ समाचार एचेंसी)

लंबे इन्द्रधनुषी पुल पर पारंपरिक शोभायात्राओं से लेकर, फूल सजाकर सुख-शांति की प्रार्थना करने तक; मुर्गों की लड़ाई और फुटबॉल की चहल-पहल से लेकर, ताज़ा सब्जियों के स्वाद तक; और पूर्वजों के स्मरण की याद में छाई शांति से लेकर, खेतों में लहलहाती गेहूं की फसलों तक—हर चीज़ में प्रकृति के प्रति सम्मान, इतिहास की यादें और जीवन के लिए चीनी लोगों का उत्साह साफ़ दिखाई देता है।"

"शहीद स्मारक में खड़े होकर मेरा दिल सम्मान से भर गया। इन क्रांतिकारी वीर शहीदों ने ही अपने खून और बलिदान से हमें आज का सुखी जीवन दिया है। हम उनके इस त्याग और समर्पण को हमेशा याद रखेंगे।" यह बात गांसु प्रांत के पिंगलियांग शहर के रेलवे मिडिल स्कूल की छात्रा वांग याहान ने कही।