सीजीएन की शीत्सांग के उमाथांग में 50-मेगावाट सौर तापीय परियोजना का निर्माण शुरू


 6 अप्रैल को सीजीएन शीत्सांग दांगश्योंग उमाथांग 50-मेगावाट सौर तापीय परियोजना का शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर के दांगश्योंग काउंटी स्थित उमाथांग ग्रामीण प्रखंड में विधिवत निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

शेनचेन स्थित चीन जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप लिमिटेड (CGN) के मुख्यालय से 6 अप्रैल को मिली जानकारी के अनुसार, "ट्रफ-प्रकार सौर तापीय विद्युत स्टेशन"— सीजीएन शीत्सांग दांगश्योंग उमाथांग 50-मेगावाट सौर तापीय परियोजना का शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर के दांगश्योंग काउंटी स्थित उमाथांग ग्रामीण प्रखंड में विधिवत निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू किया गया। यह परियोजना समुद्र तल से 4550 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इससे रात के समय भी निरंतर विद्युत उत्पादन और लचीला अधिकतम भार समायोजन संभव हो सकेगा, जिससे शीत्सांग की विद्युत ग्रिड को स्थिर, विश्वसनीय और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति प्राप्त होगी।

इस परियोजना का निवेश एवं विकास सीजीएन नवीकरणीय ऊर्जा (दांगश्योंग) लिमिटेड कंपनी द्वारा किया जाएगा। ईपीसी (अभियांत्रिकी, अभिप्राप्ति एवं निर्माण) का कार्य पावर चाइना नॉर्थवेस्ट इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है, जबकि निर्माण निगरानी की जिम्मेदारी गांसू हुआयान इंजीनियरिंग प्रबंधन परामर्श लिमिटेड कंपनी द्वारा की जाएगी। इस परियोजना में ऊष्मा-स्थानांतरण तेल आधारित ट्रफ सौर तापीय तकनीक अपनाई गई है, जिसमें 2.42 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला ऊष्मा-संग्रहक दर्पण क्षेत्र तथा कुल 68 लूप शामिल हैं, जिनमें से 8 लूप में चीन जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 8.6 मीटर अपर्चर वाले नालीदार ऊष्मा-संग्रहक लगाए गए हैं, जबकि शेष 60 लूप में 5.77 मीटर चौड़ाई वाले कलेक्टर प्रयुक्त किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह परियोजना सीजीएन शीत्सांग दांगश्योंग उमाथांग “सौर तापीय + सौर फोटोवोल्टिक” एकीकृत परियोजना का एक प्रमुख घटक है। इस एकीकृत परियोजना में 50-मेगावाट सौर तापीय विद्युत उत्पादन और 400-मेगावाट सौर फोटोवोल्टिक विद्युत उत्पादन शामिल है, जिसके 2027 तक पूर्ण रूप से चालू होने की योजना है। इसमें सौर फोटोवोल्टिक विद्युत परियोजना का निर्माण सितंबर 2025 में प्रारंभ हो चुका है, जिसे “चरागाह–सौर सह-अस्तित्व” मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन और पारिस्थितिक पशुपालन का समन्वित विकास संभव हो सके। सौर तापीय परियोजना में 6 घंटे की पिघले नमक ऊष्मा भंडारण प्रणाली तथा 20-मेगावाट का पिघले नमक विद्युत हीटर लगाया गया है, जो सौर फोटोवोल्टिक से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को अवशोषित कर उसकी अनियमितता और उतार-चढ़ाव को प्रभावी रूप से संतुलित करने में सहायक होंगी। अनुमान के अनुसार, इस एकीकृत परियोजना के पूर्ण होने पर प्रति वर्ष लगभग 71.9 करोड़ किलोवाट-घंटा विद्युत ग्रिड को आपूर्ति की जाएगी, जिससे लगभग 2.169 लाख टन मानक कोयले की बचत होगी तथा लगभग 6.523 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।