चीनी नर्तकों का भारतीय महाकाव्य से कला-संवाद: भरतनाट्यम नृत्य-नाट्य "आदि काव्य" का पेइचिंग में मंचन

शनिवार, 28 मार्च की शाम को चीन की राजधानी पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में भारत की भरतनाट्यम नृत्य-नाट्य "आदि काव्य" का मंचन किया गया।

कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने उत्साहपूर्ण संबोधन दिया। उन्होंने ‘रामायण’ को मानवता की साझा सांस्कृतिक विरासत के रूप में इसकी स्थायी आकर्षण शक्ति की सराहना और विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इस नृत्य-नाट्य की रचना प्रेरणा केवल प्राचीन महाकाव्य से ही नहीं, बल्कि “पद्म विभूषण” से सम्मानित प्रसिद्ध अनुवादक प्रोफेसर जी शियानलिन द्वारा किए गए इसके उत्कृष्ट चीनी अनुवाद में भी गहराई से निहित है।

प्रस्तुति के दौरान चीन नाट्य अकादमी की पेकिंग ओपेरा (चीन की एक पारंपरिक शास्त्रीय रंगमंच कला) की छात्रा रेन शियांगशान ने भगवान हनुमान की भूमिका निभाई। उन्होंने चीनी पेकिंग ओपेरा की सजीव शारीरिक मुद्राओं को भरतनाट्यम की अनुशासित लय के साथ अत्यंत कुशलता से जोड़ा। उनकी शारीरिक मुद्राएँ पक्षी की भाँति हल्की और फुर्तीली थीं, तथा उनके त्वरित और फुर्तीली चाल ने न केवल भगवान हनुमान के स्वरूप की तेजस्विता और दिव्यता को सटीक रूप से उभारा, बल्कि पेकिंग ओपेरा की विशिष्ट नेत्र-अभिव्यक्ति के माध्यम से भी उसे अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस अंतरविधीय प्रयास पर चर्चा करते हुए रेन शियांगशान ने साक्षात्कार में बताया कि प्रदर्शन में किए गए कई उच्च-स्तरीय कलाबाज़ी और हवा में छलांग जैसे प्रदर्शन पेकिंग ओपेरा के मूल प्रशिक्षण से आते हैं। उन्होंने कहा, “जब पेकिंग ओपेरा की अभिनय-शैली को भरतनाट्यम की कथात्मक संरचना में जोड़ा गया, तो इसका परिणाम अत्यंत प्रभावशाली और आकर्षक रहा।”

इस प्रकार की कलात्मक "रसायनात्मक संगति" ही निर्देशक जिन शानशान की प्रारंभिक सृजनात्मक दृष्टि का मूल रही। साक्षात्कार में जिन शानशान ने बताया कि इस प्रस्तुति का केंद्रबिंदु चीनी सांस्कृतिक तत्वों को भारतीय शास्त्रीय कला में समाहित करने का प्रयास था। उन्होंने कहा, “उदाहरणस्वरूप, चीनी रंगमंच की गहन परंपरा वाली ‘वानर-नाट्य’ शैली को इसमें सम्मिलित कर भगवान हनुमान के पात्र को अधिक सशक्त और प्रभावपूर्ण मंचीय अभिव्यक्ति प्रदान की गई।” चीनी कलाकारों द्वारा भारतीय संस्कृति की इस शानदार प्रस्तुति को उपस्थित भारतीय दर्शकों ने अत्यधिक सराहा। जिन शानशान ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "यहाँ उपस्थित भारतीय मित्रों को यह प्रस्तुति बेहद पसंद आई। चीनी कलाकारों द्वारा भारतीय पारंपरिक संस्कृति की इतनी उत्कृष्ट प्रस्तुति देखकर वे आत्मीयता का अनुभव कर रहे थे और पूरे मनोयोग से इसका आनंद ले रहे थे। जैसे ही संगीत आरंभ हुआ और नृत्य प्रारंभ हुआ, वे मानो उसी परिवेश में पहुँच गए और इस सांस्कृतिक सामंजस्य में पूरी तरह डूब गए हो।"

जन-दैनिक ऑनलाइन को दिए साक्षात्कार में एक विदेशी दर्शक ने भावविभोर होकर कहा, “यह अत्यंत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली है! मैंने कभी नहीं सोचा था कि चीनी कलाकारों के मंच पर मुझे इतनी भावनात्मक और मन को छू लेने वाली महाकाव्य प्रस्तुति देखने को मिलेगी। यह वास्तव में मेरी कल्पना से भी परे है।”