चीनी विदेश मंत्रालय: अमेरिका, मध्य पूर्व और यूरोपीय संघ के मुद्दों पर स्पष्ट रुख़

17 मार्च को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की।
17 मार्च को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की, जिसमें चीन-अमेरिका संबंधों, मध्य पूर्व की स्थिति, अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चीन का आधिकारिक रुख़ स्पष्ट किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संभावित चीन यात्रा और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन से जुड़े प्रश्नों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिन च्येन ने कहा कि चीन ने इस बात पर ध्यान दिया है कि अमेरिकी पक्ष ने मीडिया में आई ग़लत रिपोर्टों का सार्वजनिक रूप से खंडन किया है। अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि ये रिपोर्टें पूरी तरह ग़लत थीं और यह यात्रा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन के मुद्दे से संबंधित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन और अमेरिका राष्ट्रपति ट्रम्प की चीन यात्रा के समय और अन्य संबंधित विषयों पर संवाद बनाए हुए हैं।
मध्य पूर्व के देशों को मानवीय सहायता प्रदान करने के विषय में लिन च्येन ने कहा कि चीन हमेशा से ‘मानव साझा भविष्य वाले समुदाय’ की अवधारणा का पालन करता रहा है और अंतरराष्ट्रीयता तथा मानवतावाद की भावना को बनाए रखता है। इसी क्रम में चीन ने ईरान, जॉर्डन, लेबनान और इराक को आपातकालीन मानवीय सहायता देने का निर्णय लिया है, ताकि स्थानीय लोगों को झेल रहे मानवीय संकट को कम किया जा सके।
अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि दोनों देश ऐसे पड़ोसी हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता, और उनके बीच समस्याओं के समाधान का एकमात्र प्रभावी तरीका संवाद और बातचीत है। चीन ने दोनों देशों से अपील की है कि वे चीनी कर्मियों, परियोजनाओं और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। साथ ही, चीन अपने विभिन्न माध्यमों के ज़रिये दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संबंधों को बेहतर बनाने में रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।
यूरोपीय संघ द्वारा दो चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के संदर्भ में लिन च्येन ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि चीन इन अवैध एकतरफ़ा प्रतिबंधों का दृढ़ता से विरोध करता है। उन्होंने यूरोपीय संघ से आग्रह किया कि वह अपनी ग़लत नीतियों में सुधार करे और साइबरस्पेस में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बनाए रखने के लिए चीन के साथ ज़िम्मेदार और रचनात्मक तरीके से सहयोग करे।