ल्हासा के मोझुगोंगका ज़िले में बसंती रोशनी से वसंत की खेती की शुरुआत

ल्हासा के मोझुगोंगका ज़िले में बसंती रोशनी से वसंत की खेती की शुरुआत

9 मार्च (चीनी और तिब्बती दोनों पंचांग के अनुसार पहले महीने का 21वाँ दिन) को शीत्सांग के ल्हासा शहर के मोझुगोंगका काउंटी स्थित दापु खगोलीय वेधशाला में वार्षिक अवलोकन दिवस का आयोजन किया गया। सुबह की पहली किरणें सटीक रूप से वेधशाला के खांचे और मापन पत्थर पर पड़ीं। यह 300 साल से अधिक समय से चलने वाली परंपरा, पठारी क्षेत्रों में वसंत की खेती की शुरुआत का संकेत देती है। इस कार्यक्रम में किसान और पशुपालक अपने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा अर्चना करते दिखे, एवं बच्चे रोशनी का पीछा करते हुए आनंद ले रहे थे, तिब्बती चिकित्सा विशेषज्ञ स्थल पर गणना बताते और नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श देते दिखाई दिए। साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बनाया, जिससे प्राचीन लोकधरोहर सहभागी रूप में “जीवित” हो उठी।

अवलोकन समारोह के समापन के बाद ग्रामीण अपने उपकरण समेटकर समूह में खेतों की ओर बढ़े। वे उस कृषि समय का पालन करने लगे, जो सूरज की किरणों से “मापा” गया था। नहरें खोली गईं, सोई हुई मिट्टी को सींचा गया, जलमार्ग साफ किए गए और खेत तैयार किए गए। इस तरह नए वर्ष की कृषि गतिविधियाँ पूरी तरह शुरू हुईं। दापु वेधशाला, जो शीत्सांग की एकमात्र ऐसी वेधशाला है जिसे अभी भी इस्तेमाल किया जाता है और जो राष्ट्रीय स्तर पर गैर-सामग्रीक सांस्कृतिक धरोहर में सूचीबद्ध है, आज भी किसानों को मार्गदर्शन देती है और पठारी कृषि संस्कृति और खगोल विज्ञान की पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण की गवाह बनी हुई है।