नवकृषक पुबु दानजेंग : छिंगहाई–शीत्सांग पठारी इलाकों के उत्कृष्ट उत्पादों को शीत्सांग से बाहर पहुँचाने की पहल

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा के उत्तरी भाग स्थित “शिनटियानदी” रात्रि बाजार में पुबु दानजेंग तिब्बती और चीनी—दोनों भाषाओं में लाइव प्रसारण को सेतु बनाकर रात्रिकालीन अर्थव्यवस्था के उपभोग परिवेश के साथ नवोन्मेषी कृषक-सहायता मॉडल के एकीकरण की दिशा में पहल की है। उन्होंने छिंगहाई–शीत्सांग पठारी इलाकों के उत्कृष्ट उत्पादों को इस क्षेत्र से बाहर व्यापक बाजार तक पहुँचाने के लिए “डिजिटल सेतु” का निर्माण किया है, जिससे जन-सहायता और किसान-कल्याण की ऊष्मा स्थानीय जनजीवन की चहल-पहल के बीच प्रसारित हो रही है।

कृषक-सहायता के प्रति यह समर्पण उनके अपने जन्मस्थल के प्रति गहरे अनुराग से उत्पन्न हुआ है। प्रदेश में विशिष्ट उद्योगों की स्थिर प्रगति तथा कृषि उत्पादों की निरंतर बढ़ती बाजार-उपस्थिति को देखकर उन्होंने अपनी सामर्थ्य अनुसार योगदान देने का संकल्प लिया। इस दिशा में, लघु वीडियो निर्माण के प्रयोगात्मक प्रयासों से आरंभ कर उन्होंने क्रमशः एक टीम गठित की और कृषक-सहायता आधारित लाइव प्रसारण उद्यमिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से प्रविष्ट हुए।

उद्यम का मार्ग सरल नहीं था। प्रारंभिक चरण में संचालन अनुभव के अभाव के कारण पुबु दानजेंग को लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। पहली दो लाइव प्रसारणों में उत्पाद चयन, संवाद-समन्वय तथा ट्रैफिक संचालन जैसे पक्षों में अनुभव की कमी के चलते अपेक्षित बिक्री नहीं हो सकी। तथापि उन्होंने निराशा को स्थान नहीं दिया और परिपक्व लाइव संचालन पद्धतियों का अध्ययन करने हेतु ग्वांगझोउ प्रस्थान किया। वहाँ उन्होंने उत्पाद चयन नियंत्रण, द्विभाषी प्रस्तुति कौशल, दृश्य-संरचना निर्माण तथा ऑनलाइन दर्शक आकर्षण जैसे प्रत्येक चरण का सूक्ष्म अध्ययन एवं विश्लेषण किया।

अध्ययन पूर्ण कर लौटने के पश्चात उन्होंने शीत्सांग की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी विकास-दिशा में समायोजन किया और कृषक-सहायता का एक विशिष्ट मॉडल विकसित किया। तिब्बती-चीनी द्विभाषी संवाद के माध्यम से उन्होंने संप्रेषण की बाधाएँ दूर कीं—एक ओर स्थानीय कृषकों एवं पशुपालकों से प्रत्यक्ष समन्वय स्थापित कर उत्पादों की विशेषताओं को गहराई से समझा और उत्पादन-विक्रय संयोजन सुदृढ़ किया; दूसरी ओर देशव्यापी दर्शकों के समक्ष उच्च हिमालयी उत्पादों की गुणवत्ता और मूल्य का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। साथ ही, उन्होंने प्रसारण परिवेश में नवाचार करते हुए स्टूडियो को जमीनी स्तर तक पहुँचाया, “जनमंच” की अवधारणा विकसित की और कृषक-सहायता लाइव प्रसारण को विभिन्न क्षेत्रों की रात्रिकालीन अर्थव्यवस्था के साथ गहन रूप से जोड़ा, जिससे यह पहल अधिक लोकानुकूल और जनभावनाओं के निकट बन सकी।

यह जनसरोकारों से जुड़ा कृषक-सहायता मॉडल व्यापक सराहना प्राप्त कर रहा है। पुबु दानजेंग की पहल पर नेटिज़न्स ने हृदयस्पर्शी टिप्पणियाँ दीं, जैसे “यही है वास्तविक जनमंच”, “कौशल और प्रतिभा जनमानस में छिपी होती है”, “हमारा पूरा गाँव इसे देखता है” और “यह स्नेह और अपनत्व से परिपूर्ण मंच है” आदि, जो इस प्रयास की लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।

उत्पाद-प्रचार के साथ-साथ उन्होंने सदैव “जनता से उद्भूत, जनता को समर्पित” की मूल भावना को अक्षुण्ण रखा है। उनकी टीम में अनेक स्थानीय महाविद्यालयीन युवाओं को सम्मिलित किया गया है। उन्हें न केवल आवास एवं भोजन की सुविधा प्रदान की जाती है, बल्कि व्यावसायिक लाइव-संचालन प्रशिक्षण हेतु आर्थिक सहयोग भी दिया जाता है, जिससे युवा एक व्यावहारिक कौशल अर्जित कर अपने गृहक्षेत्र के विकास में योगदान दे सकें।

अब तक, ऑनलाइन–ऑफलाइन समन्वित मॉडल के माध्यम से, उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों के कृषकों एवं पशुपालकों को उच्च हिमालयी कृषि-विशिष्ट उत्पादों की बिक्री में दस लाख युआन से अधिक की संचयी उपलब्धि प्राप्त कराने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रकार छिंगहाई–शीत्सांग पठारी इलाकों में निहित उत्कृष्ट उत्पाद अब राष्ट्रीय व्यापक बाजार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहे हैं।