रेलयात्रा में वसंतोत्सव की उल्लासमयी छटा

चित्र जन-दैनिक से है
10 फ़रवरी की रात्रि, D138 विशेष रेलगाड़ी “लाल धरा की भावना — जिंगगांगशान” एक चलते-फिरते मंच में परिवर्तित हो गई। डिब्बों में नववर्ष का उल्लास छलक रहा था। लाल काग़ज़ी लालटेनें ऊँचाई पर टंगी थीं, खिड़कियों पर लाल वसंत-पत्र चिपके थे और सामान रखने की अलमारियों के पास लटकते चीनी शुभ-गाँठ रेल की गति के साथ मंद-मंद झूल रहे थे। चारों ओर नववर्ष की मंगलमय, उल्लासपूर्ण और सौहार्दपूर्ण छवि व्याप्त थी।
डिब्बों में सजा रंगमंच, यात्रियों ने निभाई दर्शक-भूमिका। उद्घाटन प्रस्तुति “तीन बार चीनी नववर्ष अभिवादन” के माध्यम से रेलकर्मियों ने आत्मीय भाव से यात्रियों को नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं, जिससे डिब्बों में तालियों और प्रशंसा की गूँज उठकर वातावरण उल्लास से भर गया।
पर्वत और सागर चाहे दूर हों, पर भावनाएँ एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं। इस वर्ष के वसंतोत्सव कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में देश-विदेश के युवाओं द्वारा मिलकर “समुद्र पार आकर तुमसे मिलने आया हूँ” गीत का सामूहिक गायन किया गया। यह प्रस्तुति सीमाओं को लाँघती आत्मीयता का प्रतीक बनी। रूस, इंडोनेशिया, गैबॉन और मोरक्को से आए विदेशी विद्यार्थी रेलयुवा साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गाते दिखे। स्वर-लहरियों में पर्वत-सागर पार की मित्रता की ऊष्मा साफ़ झलक रही थी और ऐसा प्रतीत हुआ मानो जन-जन के हृदयों को जोड़ने की भावना प्रत्यक्ष साकार हो उठी हो।
यात्री वांग रुईरू ने कहा, “संगीत सुनकर मैं पास के डिब्बे से यहाँ चला आया। रेल में आयोजित वसंतोत्सव का कार्यक्रम अत्यंत मनोहर और डिब्बों की सजावट सुंदर है, जो रेलकर्मियों की आत्मीय सेवा-भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।”
वही, रेल-प्रेमी यांग हुआचे ने कहा, “मैं रेलकर्मियों और कलाकारों का दिल से आभारी हूँ, जिन्होंने तेज़ दौड़ती रेल में इतना गहरा नववर्षीय उल्लास, शानदार कार्यक्रम, देश-विदेश के मित्रों के साथ संवाद और इतनी मनोरम प्रस्तुति का अनुभव करने का अवसर दिया, यह अनुभव वास्तव में अविस्मरणीय है।”
रात्रि के अँधकार में वेग से दौड़ती रेल नववर्ष की शुभकामनाएँ, सांस्कृतिक ज्योति और मित्रता की शक्ति को साथ लिए आगे बढ़ती रही। “चीनी नववर्ष” का उल्लास और “चीनी स्नेह” की गहराई पटरियों के संग दूर-दूर तक फैलती चली गई।