चीनी वैज्ञानिकों द्वारा अंटार्कटिका में उपहिमनदीय ज्वालामुखियों की पहली "पहचान फाइल" स्थापित

(CRI)09:38:28 2026-02-03


अंटार्कटिका में उपहिमनदीय ज्वालामुखियाँ।

चीन के ध्रुवीय अनुसंधान संस्थान से 1 फरवरी को मिली जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अब तक अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के नीचे 207 ज्वालामुखी खोजे हैं। इस संस्थान के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में, जिसमें चच्यांग विश्वविद्यालय, फ़ुतान विश्वविद्यालय और ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भाग लिया, पहली बार इन "हिमनदी के नीचे स्थित ज्वालामुखियों" के लिए पूर्ण "पहचान फ़ाइल" स्थापित की गई है, जो अंतर्राष्ट्रीय अंटार्कटिका वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक डेटा उत्पाद प्रदान करती है।

चीन के ध्रुवीय अनुसंधान संस्थान के बर्फ़ और हिम अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ता थ्स्वई श्यांगपिन, जिन्होंने इस अध्ययन का नेतृत्व किया, के अनुसार, अंटार्कटिक हिम चादर की औसत मोटाई लगभग 2,160 मीटर है, जिसमें सबसे मोटा बिंदु पूर्वी अंटार्कटिक हिम चादर पर विल्क्स लैंड में स्थित है, जो 4,757 मीटर तक पहुंचता है। हाल के वर्षों में, बढ़ते शोध से पता चलता है कि मोटी बर्फ की चादरों के नीचे छिपे हुए उपहिमनदीय ज्वालामुखी, उपहिमनदीय स्थलाकृति को बदल सकते हैं, बर्फ के पिघलने को बढ़ावा दे सकते हैं और उपहिमनदीय जल वैज्ञानिक गतिविधि को नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे बर्फ के प्रवाह की गतिशीलता और बर्फ की चादर की स्थिरता प्रभावित होती है।

हालांकि, अवलोकन की स्थितियों और डेटा के रिज़ॉल्यूशन में सीमाओं के कारण, लोगों में लंबे समय से अंटार्कटिका में हिमनदी के नीचे स्थित ज्वालामुखियों के स्थानिक वितरण, ज्यामितीय आकृति और संभावित प्रभावों की एक व्यवस्थित और एकीकृत समझ का अभाव रहा है।

अंटार्कटिका में हिमनद के नीचे स्थित ज्वालामुखियों पर किए गए वैज्ञानिक शोध के व्यवस्थित एकीकरण के आधार पर, शोध दल ने उपहिमनदीय ज्वालामुखियों की पहली अंटार्कटिक महाद्वीपीय संदर्भ सूची (ANT-SGV-25) स्थापित की, जिसमें 207 हिमनद के नीचे स्थित ज्वालामुखियों के लिए पूर्ण "पहचान फाइलें" तैयार की गईं और अंटार्कटिक महाद्वीप में हिमनद के नीचे स्थित ज्वालामुखियों की आकृति विज्ञान और वितरण में मौजूद शोध की कमी को पूरा किया गया। सम्बंधित शोध निष्कर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पत्रिका "अर्थ-साइंस रिव्यूज़" (Earth-Science Reviews) में प्रकाशित किए गए हैं।