सैन्यवाद का पुनरुत्थान रोकना विश्व शांति के लिए आवश्यक: चीन
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग पिन ने 29 जनवरी को कहा कि चीन सभी शांति-प्रिय देशों के साथ मिलकर सैन्यवाद के पुनरुत्थान को पूरी तरह रोकने और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तथा वैश्विक न्याय की दृढ़ता से रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रक्षा मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि हाल ही में जापानी सरकार लगातार अपने सैन्य उपकरणों के विस्तार के कदम उठा रही है। वह न केवल लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने और हथियार निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देने जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उकसाने वाले संकेत दे रही है, बल्कि इस बात की भी चर्चा है कि अमेरिका और जापान गुप्त रूप से “कमांड एकीकरण” को और गहरा करने की साज़िश रच रहे हैं। इस पर चीन की प्रतिक्रिया क्या है?
इस प्रश्न के उत्तर में च्यांग पिन ने कहा कि नई जापानी सरकार के सत्ता में आने के बाद से वह लगातार सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में जुटी हुई है। जापान सैन्य प्रतिबंधों को कम करने की अपनी योजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, “जवाबी हमला क्षमता” के बहाने आक्रामक हथियारों के निर्माण को उचित ठहराने की कोशिश कर रहा है, और यहां तक कि खुले तौर पर “परमाणु हथियार सिद्धांत” का समर्थन भी कर रहा है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जापान पर एक पराजित देश के रूप में लागू उन ज़िम्मेदारियों का गंभीर उल्लंघन है, जिनका उल्लेख काहिरा घोषणा और पॉट्सडैम घोषणापत्र जैसे दस्तावेज़ों में स्पष्ट रूप से किया गया है।
च्यांग पिन ने कहा कि जापान की इन गतिविधियों से एशिया और विश्व की शांति तथा स्थिरता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता और सतर्कता बढ़ गई है।