छिनलिंग पर्वतीय क्षेत्र के “पीठ पर टोकरी लिए विद्युत कर्मी”


चित्र शिंगहवा एजेंसी से है

हाल ही में ठंड की तीव्र लहर ने चीन के गांसू प्रांत के लोंगनान शहर के लिआंगदांग ज़िले को अपनी चपेट में ले लिया। यांगद्यान विद्युत उपकेंद्र के प्रभारी सोंग गांग ने अपने दल के सदस्यों के साथ आवश्यक औज़ारों की जाँच की और तीन बाँस की पीठ-टोकरी वाहन के पिछले हिस्से में रखीं। इसके बाद वे पहाड़ों की परतदार शृंखलाओं और गहरी घाटियों में प्रवेश कर गए, जहाँ से दिनभर चलने वाला लाइन निरीक्षण और विद्युत आपूर्ति संरक्षण कार्य आरंभ हुआ।


चित्र शिंगहवा एजेंसी से है

लिआंगदांग ज़िला छिनलिंग पर्वतीय क्षेत्र में, गांसू–शान्शी–सिचुआन की सीमा पर स्थित है, जहाँ 95 प्रतिशत से अधिक भू-भाग पर्वतों से आच्छादित है। सोंग गांग के नेतृत्व वाला यांगद्यान विद्युत उपकेंद्र 5 कस्बों, 42 प्रशासनिक गाँवों और 121 प्राकृतिक बस्तियों को विद्युत आपूर्ति की ज़िम्मेदारी निभाता है तथा इसके अधीन 500 किलोमीटर से अधिक की विद्युत लाइनें हैं।

“पहले यातायात सुविधाएँ बेहद सीमित थीं और औज़ार ढोने के लिए पीठ-टोकरी हमारी अनिवार्य “काम की साथी” हुआ करती थी। आज भले ही ग्रामीण सड़कों का जाल गाँव-गाँव तक पहुँच चुका है, लेकिन कई दुर्गम पगडंडियों और आपात मरम्मत स्थलों पर पीठ-टोकरी आज भी हमारी सबसे भरोसेमंद “पुरानी साथी” बनी हुई है।” यह कहना है 30 से अधिक वर्षों से जमीनी स्तर पर कार्यरत विद्युत केंद्र के कर्मचारी सोंग गांग का। इसी कारण स्थानीय लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “पीठ-टोकरी वाले बिजली मिस्त्री” कहकर पुकारते हैं।


चित्र शिंगहवा एजेंसी से है

घने पर्वतीय वनों के भीतर अनेक ऐसे बुज़ुर्ग अकेले रहते हैं, जिनकी चलने-फिरने की क्षमता सीमित है। वर्षों से चला आ रहा साथ और निरंतर देखभाल ने इन बुज़ुर्गों के मन में “पीठ-टोकरी वाले बिजली मिस्त्रियों” को अपने परिवार का सदस्य बना दिया है। जब भी घर में चावल या आटे की कमी हो जाती है, बुज़ुर्ग स्वयं सोंग गांग को फ़ोन कर आवश्यक सामान मँगवाने की ज़िम्मेदारी सौंप देते हैं। लाइन निरीक्षण और विद्युत आपूर्ति संरक्षण के दौरान बिजली कर्मी ये दैनिक उपयोग की वस्तुएँ पीठ-टोकरी में रखकर एक-एक घर तक पहुँचाते हैं।

ग्रामीण विद्युत जाल के निर्माण के कठिन कार्यों से लेकर आपातकालीन राहत और बचाव के मोर्चों तक, और अब ग्रामीण उत्थान की दिशा में, सोंग गांग जैसे “पीठ-टोकरी वाले बिजली मिस्त्री” पहाड़ी इलाक़ों में लगातार दौड़ते हुए, गहरी पहाड़ियों में रहने वाले हजारों परिवारों के घरों की रोशनी जगाते हैं और लोगों के दिलों को जोड़ने का सेतु बनाते हैं।