मनमोहक ऋतु: महाशीत

नमस्ते दोस्तों! मैं यात्रा-प्रेमी Sisi हूँ। आज हम 24 सौर पर्वों के "अंतिम अध्याय" —महाशीत का स्वागत करते हैं। सबसे मोटा रजाईदार कोट पहनिए और मेरे साथ बर्फ़ की सफ़ेद चादर से ढकी हुई "चीन की शीत-ध्रुव" कही जाने वाली जगह — आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के गेंघे शहर — की सैर पर चलिए।

चीन के शीत-ध्रुव शीत टावर के नीचे बड़ी संख्या में पर्यटक जुटे हुए हैं। 24 मीटर ऊँचा यह टॉवर उस दिन का तापमान प्रदर्शित करता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, यहाँ का न्यूनतम तापमान कभी माइनस 58 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र की तीव्र शीत का अंदाज़ा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यहाँ उछाला गया गरम पानी पल भर में ही बर्फीली धुंध में परिवर्तित हो जाता है।

महाशीत के इस सौर पर्व में, जब चारों ओर ज़मीन बर्फ़ से जमी रहती है, तब भी गेंघे की "न जमने वाली नदी" निरंतर बहती रहती है। जलधारा से उठती धुंध धीरे-धीरे ऊपर उठकर वृक्षों की शाखाओं से लिपट जाती है और प्रकृति एक अनुपम तुषार-वृक्ष (वूसोंग) की चित्रमय छटा रच देती है। आओलुगुया रेनडियर समुदाय पर्यटन क्षेत्र में, बर्फ़बारी के बाद के जंगलों के बीच बारहसिंघे शांत भाव से खड़े दिखाई देते हैं। पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप इस श्वेत परिदृश्य को आलोकित कर देती है, और यहाँ पहुँचे पर्यटक इस क्षण को एक गहन आंतरिक शुद्धि और आत्मिक अनुभूति के रूप में अनुभव करते दिखाई दे रहे हैं।

महाशीत सौर पर्व का कृषि से भी गहरा संबंध है। चीनी एक पुराना कहावत है कि में यदि तीन बार धरती बर्फ़बारी से सफ़ेद हो जाए, तो किसानों के पास पहनने और खाने की कोई कमी नहीं रहती। इसका आशय यह है कि यदि महाशीत के दौरान पर्याप्त हिमपात हो, तो कड़ाके की ठंड प्राकृतिक रूप से कीट-पतंगों को नष्ट कर देती है, परिणामस्वरूप भूमि की उर्वरता बढ़ती है और आने वाले वर्ष में फसलों की अच्छी पैदावार होने की संभावना प्रबल हो जाती है।

ठंड से मुकाबला करने का रहस्य चीनी लोगों की रसोई में छिपा है। महाशीत के दिन चिपचिपे चावल से बने व्यंजन खाने की परंपरा है, क्योंकि ये शरीर को जल्दी ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करते हैं। चीन के उत्तरी इलाकों में "सर्दी दूर करने वाला केक" खाने की परंपरा है, जो उन्नति और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना जाता है।वहीं दक्षिण में लोग चिकन सूप पकाते हैं—एक कटोरा पौष्टिक चिकन सूप पीने के बाद, शरीर की सारी ठंड जैसे दूर हो जाती है और स्फूर्ति लौट आती है।

वास्तन में, ठंड का सामना करते समय दुनिया भर के लोगों की समझ और तरीके आश्चर्यजनक रूप से समान होते हैं। उत्तरी यूरोप के स्कैंडेनेवियाई प्रायद्वीप में, डेनमार्क के लोग लंबी सर्दियों के दौरान "ह्यूगे (Hygge)"—यानी आराम, सुकून और अपनत्व—की संस्कृति को पीढ़ियों से संजोते आ रहे हैं। गरम पेय तैयार करना और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेना—ये सभी व्यवहार चीन में महाशीत के समय अपनाई जाने वाली "भोजन द्वारा शरीर को ऊष्मा प्रदान कर ठंड से बचाव" की परंपरा से भले ही भौगोलिक रूप से भिन्न हों, किंतु उनके निहित भाव और उद्देश्य गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

महाशीत के बीतते ही, वसंत मानो अपना सामान समेटकर राह पर निकल पड़ा है! कमेंट सेक्शन में आने वाले बसंत के लिए अपनी एक इच्छा ज़रूर साझा कीजिए। जैसा कि कहा गया है: "हृदय में धैर्य और अडिगता संजोए रखें, क्योंकि वर्ष को महाशीत ही उसकी परिपक्वता का बोध कराता है।"