पारिस्थितिकी को प्राथमिकता, छिंगहाई-शीत्सांग पठार में नई जीवन्तता


चित्र VCG से है

जब वर्ष 2025 की अंतिम सांझ की किरणें नांगाबावा शिखर पर पड़ीं, तो “स्वर्ण पर्वत पर सूर्य-प्रकाश” का दृश्य एक बार फिर प्रकट हुआ। शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के लिंगची क्षेत्र के मिलिन शहर स्थित सुओसोंग गाँव में एकत्र पर्यटक विस्मय से कह उठे— “अविश्वसनीय रूप से सुंदर !”

आम धारणा है कि ऊँचे पठारों पर विशाल वृक्ष दुर्लभ होते हैं, किंतु शीत ऋतु में भी शीत्सांग हरियाली से भरपूर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यहाँ की पहाड़ियाँ धूसर और उजाड़ थीं। बंजर पर्वतों का हरित रूप धारण करना एक दिन का कार्य नहीं है। पारिस्थितिकी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीत्सांग ने अपने कुल भूभाग के आधे से अधिक हिस्से को पारिस्थितिक संरक्षण की लाल रेखा के अंतर्गत शामिल किया है। क्षीण हो चुकी आर्द्रभूमियों और घासभूमियों का पुनर्स्थापन किया गया, उत्तर–दक्षिण पर्वतीय हरितीकरण परियोजना के अंतर्गत 73 हज़ार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में वनीकरण हुआ, और लगभग 5.16 लाख पर्यावरण रक्षक अपने आवासीय क्षेत्र की देखभाल में जुटे हैं। इन प्रयासों ने हिमाच्छादित उच्चभूमि को स्वच्छ जल, हरित वन और नील आकाश का वरदान दिया है।

सशक्त पारिस्थितिक वातावरण ही सर्वाधिक व्यापक जनकल्याण है। रास्ते भर चलते हुए देखा गया कि स्वच्छ ऊर्जा का तेज़ी से विकास हो रहा है। गाँव के निवासी खुद एक्सकेवेटर चलाकर याशिया जलविद्युत परियोजना के निर्माण में भाग ले रहे हैं। पारिस्थितिक पर्यटन और भी फल-फूल रहा है; पोमी काउंटी के गालांग गाँव में शीत्सांग घर अब अतिथि गृह में बदल गए हैं और “आड़ू फूल महोत्सव” के माध्यम से भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। विशेष उद्योग को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है—तियानमा और लिंगज़ी उद्योग पार्क न केवल जंगल के नीचे कृषि का विकास कर रहे हैं, बल्कि पर्यटकों को गहन अनुभव के लिए भी आकर्षित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग 318 के किनारे चलते हुए, पास ही बहती यारलुत्सांगपो नदी हरे रेशमी धागे की तरह दूर तक फैलती दिखाई देती है। यहाँ के जीव-जंतु, वनस्पति और अपार जल-संपदा की सुरक्षा के कारण यह हरियाली लगातार नई ऊर्जा और जीवंतता से भरती रहेगी।