तीन दशकों के बाद! चीन के वैज्ञानिक अनुसंधान दल और ऐडेली पेंगुइनोंकी अंटार्कटिका में मुलाकात

इस वर्ष, चीन की42वीं अंटार्कटिका वैज्ञानिक अनुसंधान दल ने तय समय पर छिनलिंग स्टेशन पहुँकर ऐडेली पेंगुइनों की निगरानी और अनुसंधान कार्य को आगे बढ़ाया।


दिसंबर 2025 में, पेइचिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय से आए चीन के 42वें अंटार्कटिक अभियान दल के सदस्य मा मिंगहाओ ने छिनलिंग स्टेशन से कुछ किलोमीटर दूर, एन्क्सबर्ग द्वीप के पूर्वी भाग में स्थित ऐडेली पेंगुइन के घोंसले वाले क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग कर पेंगुइन समूहों का अवलोकन और रिकॉर्डिंग की। (चित्र इंटरव्यू देने वालों से है)

ध्रुवीय पारिस्थितिकी अनुसंधान: "स्थानीय निवासी" से जानें पर्यावरणीय बदलाव की कहानी

अंटार्कटिका के पक्षियों पर चीन का व्यवस्थित वैज्ञानिक अनुसंधान 1990 के दशक में शुरू हुआ। शुरुआती अभियानों में संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के कारण डेटा का प्रणालीबद्ध और निरंतर संग्रह करना कठिन था। बाद में, चीन की ध्रुवीय वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं में निरंतर वृद्धि के साथ, विशेष रूप से अंटार्कटिका में छिनलिंग स्टेशन की स्थापना के बाद, अब नियमित, दीर्घकालिक और सूक्ष्म स्तर की निगरानी करना संभव हो गया है। संभव हो सकी है।

"उनकी आबादी के आकार, प्रजनन-सफलता दर, समय-स्थानगत गतिशीलता और आवासीय विशेषताओं की निगरानी करना, मानो एक जीवंत ‘ध्रुवीय पारिस्थितिकी वार्षिकी’ को पढ़ने जैसा है।" पेइचिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय से आए चीन के 42वें अंटार्कटिक अभियान दल के सदस्य मा मिंगहाओ ने कहा। उनके अनुसार, ये आँकड़े न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को दर्शाते हैं, बल्कि अंटार्कटिका पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने की एक महत्वपूर्ण खिड़की भी प्रदान करते हैं।


दिसंबर 2025 में, छिनलिंग स्टेशन से कुछ किलोमीटर दूर एन्क्सबर्ग द्वीप पर स्थित ऐडेली पेंगुइन का घोंसला क्षेत्र। (चित्र इंटरव्यू देने वालों से है)

दर्ज और संरक्षण : पृथ्वी पर जीवन के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता

इस वर्ष के अभियान के प्रमुख मिशनों में से एक ऐडेली पेंगुइनों के ऊष्मायन (अंडा सेने) के पैटर्न की निगरानी और अध्ययन है। चूँकि ऐडेली पेंगुइनों के नर और मादा बाहरी रूप से अलग नहीं दिखते, इसलिए शोधकर्ता वयस्क पेंगुइनों को चिन्हित करते हैं और यह विश्लेषण करते हैं कि माता-पिता द्वारा बारी-बारी से अंडे सेने की प्रक्रिया प्रजनन-सफलता दर को किस प्रकार प्रभावित करती है।


पेइचिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर झांग यानयुन, चीन के 34वें अंटार्कटिक अभियान दल की सदस्य के रूप में, एन्क्सबर्ग द्वीप पर अपने साथियों के साथ भ्रमण करते हुए पेंगुइनों और उनके आवास का अध्ययन कर रहे हैं। (चित्र इंटरव्यू देने वालों से है)

तीन दशकों की श्रृंखला: रिक्त स्थान भरने से लेकर "चीनी समाधान" तक

हाल के वर्षों में, चीन ने ड्रोन हवाई फ़ोटोग्राफ़ी, स्वचालित छवि पहचान और ध्वनिक रिकॉर्डिंग विश्लेषण जैसी नई तकनीकों को अपनाया है, जिससे पेंगुइनों की निगरानी और अनुसंधान की दक्षता व सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप, वैज्ञानिक अब प्रजनन जोड़ों की संख्या को कहीं अधिक सटीकता से समझ और आकलित कर पा रहे हैं।

अध्ययन के आँकड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीय जैव-विविधता डेटाबेस में समाहित किए जा रहे हैं, जो अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन और संरक्षण के प्रभावों के आकलन का महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। साथ ही, वे ध्रुवीय शासन में चीन द्वारा प्रस्तुत "चीनी समाधान" की वैज्ञानिक नींव भी प्रदान करते हैं।