डिंगरी भूकंप:“तम्बू में उष्ण चाय” से “घरों में खिलखिलाहट” तक का सफ़र

“चाचाजी , हम फिर आपसे मिलने आए हैं!” डिंगरी भूकंप की पहली वर्षगांठ के अवसर पर संवाददाता ने फिर से शिगात्से शहर के लाज़ी काउंटी के शीचिन ग्रामीण प्रखंड, शालासु गाँव का दौरा किया। गाँव के पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने स्थानीय निवासी 65 वर्षीय त्सिरें डोंगजू से मुलाकात की।

भूकंप के कारण उनके घर में पड़ी दरारें अब मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के बाद पूरी तरह मिटा दी गई हैं। वे उत्साहित होकर धूप में चमकती सफेद दीवार की ओर इशारा करते हुए हल्के हाथ से उसे सहलाते हैं और कहते हैं, “देखिये, अब कोई निशान तक नहीं बचा!”

पिछले साल, डिंगरी काउंटी में 6.8 तीव्रता का भूकंप शालासु गांव तक पहुँचा, जिससे कई ग्रामीणों की ज़िंदगी अचानक अस्त-व्यस्त हो गई। इसी दौरान संवाददाता की मुलाकात त्सिरें डोंगजू से हुई थी। तब वे अस्थायी तम्बू में रह रहे थे और उत्साहपूर्वक संवाददाता को चाय पर बुलाया करते थे। कुछ बातचीत और मुलाकातों के बाद दोनों में घनिष्ठता बन गई।

“अक्टूबर 2025 के अंत तक, शीचिन ग्रामीण प्रखंड में 1121 घरों का पुनर्निर्माण और 82 घरों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, और सभी घर ग्रामीणों को आवंटित कर दिए गए हैं।” शीचिन ग्रामीण प्रखंड के पार्टी सचिव और जनता प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष त्साशी पिंगचो ने यह जानकारी दी। ये आंकड़े त्सिरें डोंगजू के घर में अब दृश्य और स्पर्शनीय वास्तविकता में बदल चुके हैं।

त्सिरें डोंगजू के गर्मजोशी भरे निमंत्रण पर संवाददाता ने उनका घर देखा। सीढ़ियाँ चढ़ते हुए दूसरी मंज़िल का खुला गतिविधि क्षेत्र नजर आया, जो तीसरी मंज़िल के साथ एक पारदर्शी दो-तल वाले (लॉफ्टेड) संरचना में जुड़ा हुआ था। सूर्य की किरणें तीसरी मंज़िल की सनशेड से कमरे में प्रवेश कर उजाले और गर्माहट भर रही थीं।

“यह ज़िंदगी सच में दिन-ब-दिन खुशहाल होती जा रही है!” त्सिरें डोंगजू अपनी उंगलियों से गिनती करते हुए बताते हैं कि एक साल में घर की आमदनी 2 लाख युआन से अधिक बढ़ गई, जिसमें शुद्ध आय लगभग 1.5 लाख युआन रही।

साक्षात्कार के बाद, जब संवाददाता शालासु गांव की गलियों में चलता है, तो व्यवस्थित घरों के बीच राहगीरों और बैठे ग्रामीणों की बातें, साथ ही हवा में तैरती मक्खन वाली चाय की खुशबू—सब ऐसा प्रतीत होता है, जैसे पूरा वातावरण जीवंत हो उठ गया हो। सामान्य उत्पादन और जीवन में लौटे ग्रामीण सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी रहे हैं, और पूरा गाँव हर ओर जीवन्तता और समृद्धि से भरा दिखाई देता है।