शीत्सांग के शिगात्से में 48 विश्वविद्यालयी छात्रों को 24 हजार युआन की सहायता राशि प्रदान

हाल ही में शीत्सांग के शिगात्से शहर के लाजी काउंटी अंतर्गत झाशीगांग टाउनशिप के युतुओ गाँव की ग्राम समिति परिसर में आत्मीयता और ऊष्मा का वातावरण दिखाई दिया। वसंतोत्सव तथा शीत्सांग नववर्ष की पूर्व संध्या पर, शिगात्से राजमार्ग विकास एवं आपात प्रबंध एवं सुरक्षा केंद्र की युतुओ गाँव में तैनात कार्यदल द्वारा एक विश्वविद्यालयी छात्र सहायता एवं सांत्वना कार्यक्रम का सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान, स्नेह और चिंता से परिपूर्ण सांत्वना राशि अभिभावकों के हाथों में सौंपी गई। इससे गाँव के 48 अध्ययनरत विश्वविद्यालयी छात्रों के अभिभावकों को कार्यदल की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ और सहयोग प्राप्त हुआ। कुल 24 हजार युआन की सांत्वना राशि ने इस शीतकाल में गाँव के परिवारों के जीवन में विशेष मानवीय ऊष्मा और संवेदना का संचार किया।

“ये 500 युआन शायद कहीं और बहुत बड़ी राशि न हो, लेकिन हमारे बच्चों के लिए यह एक अत्यंत मूल्यवान स्नेहपूर्ण सहयोग है।“ वृद्ध अमा यांगजिन ने अपनी पोती की ओर से सांत्वना राशि ग्रहण करते हुए भावुक स्वर में कहा। उनकी आँखों में कृतज्ञता छलक रही थी।“कार्यदल के शिक्षकों ने सचमुच बहुत दूरदर्शिता और अपनापन दिखाया है, जिसने हमारे अंतर्मन को भीतर तक आलोकित और सांत्‍वना से भर दिया है। “

पिछले एक वर्ष में युतुओ गाँव ने भूकंप के प्रभाव और आपदा-पश्चात पुनर्निर्माण की व्यस्तता का सामना किया। इस समय सांत्वना राशि प्राप्त करने वाले अभिभावकों की बातों में गहरी भावनाएँ और अनुभव झलक रहे थे। उन्होंने एक स्वर में गाँव में तैनात कार्यदल और ग्रामीणों के बीच सुख–दुःख साझा करने की अनेक स्मृतियों का उल्लेख किया। विशेष रूप से दल-प्रमुख छिदान नानज्या द्वारा गाँव, ग्रामीणों और निराश्रित बुज़ुर्गों के लिए बार-बार सहायता जुटाने के प्रयास आज भी लोगों की स्मृति में जीवंत हैं। ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा, “उन्होंने हमें सच्चे अर्थों में यह एहसास कराया कि पार्टी और सरकार हमारे साथ, हमारे बिल्कुल पास हैं। इससे हमारे मन में गहरा भरोसा और संतोष पैदा होता है।”

इस स्नेहपूर्ण पहल के पीछे कृतज्ञता की भावना की एक निरंतर श्रृंखला निहित है। छिदान नानज्या ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं स्वयं भी कभी एक विश्वविद्यालय का छात्र रहा हूँ। पढ़ाई के दिनों में पारिवारिक आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शुल्क और जीवन-यापन का खर्च जुटाना अक्सर कठिन हो जाता था। उस समय रिश्तेदारों और समाज के सद्भावनापूर्ण लोगों की सहायता ने मुझे संबल दिया। भले ही वह राशि बड़ी नहीं थी, लेकिन उसने मेरी तत्काल आवश्यकता को पूरा कर दिया। यह अपनापन मैं आज भी हृदय में संजोए हुए हूँ। अब मैं भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस सद्भावना को आगे बढ़ाना चाहता हूँ।” शिगात्से के ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर आगे बढ़े इस युवा के मन में सदैव अपने गाँव और जन्मभूमि के उपकार का प्रतिदान करने की भावना रही है। आज, तैनाती इकाई से सक्रिय रूप से समन्वय कर “प्रथम सचिव—जनसेवा विशेष निधि” की स्थापना के माध्यम से वह अपने वचन को क्रमशः साकार कर रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों के हृदय तक उष्मा, भरोसा और आशा पहुँचा रहे हैं।