जापान और कई अन्य देशों और संस्थानों द्वारा चीन के सैन्य अभ्यासों की अनुचित आलोचना सरासर पाखंड है: चीनी विदेश मंत्रालय
31 दिसंबर को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। चाइना मीडिया ग्रुप के एक संवाददाता ने पूछा, "खबरों के अनुसार, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ के संस्थानों और कुछ यूरोपीय देशों ने थाईवान के पास चीन के सैन्य अभ्यासों पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है। इस पर प्रवक्ता की क्या प्रतिक्रिया है?"
लिन च्येन ने कहा कि ये देश और संस्थान थाईवान की स्वतंत्रता के लिए बलपूर्वक स्वतंत्रता प्राप्त करने के प्रयासों को अनसुना कर देते हैं और चीन के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को अनदेखा करते हैं, फिर भी वे राष्ट्रीय संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए चीन की आवश्यक और न्यायसंगत कार्रवाइयों के बारे में अनुचित आलोचना करते हैं, सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और सही-गलत को लेकर भ्रम पैदा करते हैं। यह बेहद पाखंड है और चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
लिन च्येन ने कहा कि थाईवान चीन का एक अभिन्न अंग है। थाईवान का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी बाहरी ताकत का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। थाईवान जलडमरूमध्य की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि दोनों पक्ष एक चीन का हिस्सा हैं, और थाईवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा "थाईवान की स्वतंत्रता" की अलगाववादी गतिविधियां और बाहरी ताकतों की मिलीभगत और समर्थन है। एक-चीन सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत सहमति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक बुनियादी मानदंड है। यह चीन के लिए उन 183 देशों के साथ संबंध विकसित करने का राजनीतिक आधार है जिन्होंने चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों ने चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करते समय इस सिद्धांत के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई थी। हम उपर्युक्त देशों और संस्थानों से आग्रह करते हैं कि वे एक-चीन सिद्धांत का सख्ती से पालन करें, चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करें और "ताईवान की स्वतंत्रता" की अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देना और उनका समर्थन करना बंद करें।