थाईवान की स्थिति "अटक गई" है: वांग यी
8 दिसंबर को, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने पेइचिंग में जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ वार्ता के दौरान थाईवान मुद्दे के ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी संदर्भ की विस्तृत व्याख्या की।
वांग यी ने कहा कि वर्तमान जापानी नेता ने हाल ही में यह बेतुका बयान दिया है कि अगर थाईवान पर हमला हुआ तो जापान बल प्रयोग कर सकता है। यह चीन की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का गंभीर उल्लंघन है, चीन से अब तक की गई प्रतिबद्धताओं का स्पष्ट उल्लंघन है, द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की उपलब्धियों और युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सीधे चुनौती देता है, और एशिया, यहां तक कि विश्व में शांति के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है।
वांग यी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि थाईवान प्राचीन काल से ही चीनी क्षेत्र रहा है। कई अकाट्य तथ्य राजनीतिक और कानूनी रूप से पूरी तरह साबित करते हैं कि थाईवान चीनी भूमि है और इसकी स्थिति "अटक गई" है। "थाईवान की स्वतंत्रता" का प्रयास करना चीनी भूमि को विभाजित करने के समान है, और "थाईवान की स्वतंत्रता" का समर्थन करना चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है, जो चीनी संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानून दोनों का उल्लंघन है।
वांग यी ने कहा कि इस वर्ष चीनी जनता के जापानी अतिक्रमण विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ है। एक पराजित राष्ट्र के रूप में, जापान को विशेष रूप से अपने पिछले कार्यों पर गहराई से विचार करना चाहिए तथा अपने शब्दों और कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन यही देश, जिसने 50 वर्षों तक थाईवान पर उपनिवेश बनाए रखा और चीनी लोगों के विरुद्ध अनगिनत अपराध किए, अब उसकी वर्तमान नेता थाईवान का उपयोग करके अशांति फैलाने और चीन को बलपूर्वक धमकाने का प्रयास कर रही है। यह असहनीय है। चीनी लोगों और दुनिया के सभी शांतिप्रिय लोगों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को बनाए रखें और जापान को पुनः सैन्यीकरण करने या यहाँ तक कि सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास करने से रोकें।