मनमोहक ऋतु: लिछ्यो - शरद ऋतु का आगमन
नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ आपकी यात्रा प्रेमी Sisi! चीनी ल्यूनर कलैंडर के हिसाब से आज "लिछ्यो" – यानी शरद ऋतु का आगमन का शुभ दिन है। आइए, मेरे साथ चलिए चीनी हेपए प्रांत के छंगदे शहर और महसूस करे पतझड़ मौसम की पहली ठंडी हवा और शरद ऋतु की दस्तक !
"लि-छयो" में लि का अर्थ होता है शुरुआत और "छ्यो" होता है पतझड़ मौसम ,यानी फसलों के पकने का मौसम । लिछ्यो ऋतु के बाद, गर्मी और ठंडक का बारी-बारी आना-जाना बना रहता है, सूरज व बादल अपने अपने स्थान बदलते रहते हैं, सारी सृष्टि हरियाली परिपक्वता की ओर बढ़ती है। प्राचीन काल से ही, लिछ्यो ऋतु को कृषि समाज का एक अहम मोड़ माना जाता है, जो संकेत देता है कि फसलें अब कटाई के दौर में प्रवेश कर रही हैं।
इस समय अगर आप छंगदे में सैर के लिए निकलते हैं, तो देख सकते हैं कि ग्रीष्म भवन के चीड़ वन समुदाय पेड़ों की गहरी हरी सुईनुमा पत्तियाँ नीले गगन के साथ मधुर ताल का सामंजस्य बना रहे हैं , और चीड़ पेड़ों के यह समूह अपनी वार्षिक वलयों में चौबीस ऋतु-चिह्नों के एक पूरे चक्र को संजोए हुए हैं।
चीड़ के शंकु टहनियों पर लटके हुए हैं, और उनकी भीनी सुगंध हवा में तैर रही है। दरकती छाल के भीतर वहां रेजिन छिपी है जो सर्दियों की कठोरता का सामना करती है — और वहां पर भी छिपी है वह कारीगरी की भावना , जिसमें "चीड़ जैसे गुणों से सद्गुण की उपमा" मिलती है।
लिछ्यो ऋतु का मतलब है कि पतझड़ का मौसम आने वाला है, लेकिन अधिकतर क्षेत्रों में अभी भी चिलचिलाती गर्मी बनी रहती है। तापमान अब भी ऊँचा रहता है, जिसे स्थानीय लोग शरद बाघ की संज्ञा देते है, इसलिए इसे “पतझड़ का बाघ” भी कहा जाता है। इस तरह, लिछ्यो ऋतु वास्तव में शरद के आने की एक प्रतीकात्मक शुरुआत ही होती है और असली पतझड़ आने में अभी कुछ समय लगेगा । जैसा कि कहा जाता है कि पतझड़ तो आ गया, पर गर्मी अभी गई नहीं।
लिछ्यो ऋतु कई परंपराएँ व्यंजनों से जुड़ी होती हैं, जैसे 'थ्ये छ्यो बिऔ' ( शरीर में अतिरिक्त ताकत भरना) और “खन छ्यो” (पतझड़ के स्वागत में तरबूज खाना)। “थ्ये छ्यो बिऔ” की पहली पसंद मांस खाना है — मांस खाकर गर्मियों की तपन से हुई कमजोरी की भरपाई की जाती है। वहीं “खन छ्यो” का मतलब है लिछ्यो ऋतु के दिन तरबूज खाना। “खन” यानी चबाना , लोग गर्मी को चबा कर परेशानियों से दूर निकलने की तमन्ना करते हैं और शरद की ठंडी हवा का स्वागत करने की उम्मीद रखते हैं।
हर वर्ष लिछ्यो ऋतु के आस-पास, तुर्कमेनिस्तान में भी सालाना खरबूज का त्योहार मनाया जाता है। लोग एकत्रित होकर खुशबूदार, रसदार खरबूजा और तरबूज का स्वाद लेते हैं, ताकि वे धरती के उपहार के लिए आभार व्यक्त कर सकें और फसल कटाई के मौसम का जश्न मना सकें। यह परंपरा चीन के लिछ्यो ऋतु रीति-रिवाजों से मेल खाती है, जो दिखाती है कि अलग-अलग संस्कृतियां इस मौसम में ऋतु चक्र का सम्मान करती हैं और सुंदर जीवन की आकांक्षा जताती हैं।
“ वर्षा बाद सूनी पहाड़ी लाती है शाम की शीतल पतझड़ बहार ।” चाहे आप जहां भी हों, मैं कामना करती हूँ कि यह ठंडक और शांति सीमा-पार कर सभी दोस्तों को हमारा शुभ-मंगलमंय संदेश पहुंचाएगी।